रांची, 04 अक्टूबर । झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की शासन व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री को आत्ममंथन की सलाह देते हुए कहा कि उनके शासन में व्यवस्था किस स्तर तक पहुंच गई है, इस पर उन्हें शांत मन से चिंतन करना चाहिए।
मरांडी ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कई मामलों का उल्लेख किया और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जमीन घोटाला मामले में मुख्यमंत्री के विरुद्ध आरोप गठित हो चुका है। ईडी अधिकारियों पर कथित रूप से फर्जी एससी-एसटी एक्ट लगाने के मामले में जवाब नहीं देने पर उच्च न्यायालय द्वारा 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
नेता प्रतिपक्ष ने शराब घोटाला मामले का जिक्र करते हुए दावा किया कि एसीबी की अदालत में सरकार के सचिव पर नीति में बदलाव के लिए 50 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने की बात कही गई है। उन्होंने पत्थर घोटाले में सीबीआई जांच के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत ने मुख्य आरोपित द्वारा मुख्यमंत्री के प्रभाव का इस्तेमाल किए जाने की बात कही है।
मरांडी ने पेपर लीक मामले को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री छात्रों को ही माफिया बताते थे, तब अब उनके करीबी लोगों की ओर से पैसे लेकर इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के कथित सबूत अदालत के सामने आने की बात कही जा रही है।
उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री यदि चाहते तो अपने विश्वस्त लोगों और करीबी अधिकारियों को भ्रष्टाचार से रोक सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल में कितने अधिकारियों का करियर दांव पर लगा, कितनी संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हुई और जनता का व्यवस्था से भरोसा कितना कमजोर हुआ, इस पर भी सरकार को विचार करना चाहिए।
मरांडी ने कहा कि स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि यदि मुख्यमंत्री को किसी मामले में सजा होती है तो भविष्य में चुनाव लड़ने की पात्रता भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री और अधिकारियों से वास्तविकता समझने तथा समय रहते व्यवस्था में सुधार करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सत्ता हमेशा किसी के पास नहीं रहती। लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी की राजनीतिक परिस्थितियों से सीख लेने की सलाह देते हुए मरांडी ने कहा कि सत्ता और प्रभाव स्थायी नहीं होते। उन्होंने मुख्यमंत्री से समय रहते चेतने, गलतियों से सबक लेने और शासन व्यवस्था में सुधार करने को कहा।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बालू, पत्थर, कोयला और अन्य खनिज संसाधनों का इस्तेमाल जनता के हित, विकास और रोजगार के लिए होना चाहिए। उन्होंने प्रखंडों, थानों और सरकारी कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई की मांग की।
मरांडी ने कहा कि अभी भी समय है। सरकार को व्यवस्था सुधारनी चाहिए और जनता का भरोसा कायम करना चाहिए। सत्ता में बैठे लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि सत्ता और पावर किसी की स्थायी नहीं होती। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए अहंकार करना आसान होता है, लेकिन सत्ता से बेदखल होने के बाद वही अहंकार सबसे बड़ा बोझ बन जाता है। इसलिए समय रहते चेत जाना चाहिए, क्योंकि इतिहास किसी को माफ नहीं करता।——–
