कोलकाता, 22 सितंबर । मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रसिद्ध साहित्यकार और पटकथा लेखक शरदिंदु बंद्योपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ‘सत्यान्वेषी’ व्योमकेश बक्शी के स्रष्टा शरदिंदु बंद्योपाध्याय को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।
शरदिंदु बंद्योपाध्याय का जन्म 30 मार्च 1899 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर में हुआ था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और कुछ समय तक वकालत भी की। बाद में साहित्य और पटकथा लेखन को अपना मुख्य क्षेत्र बनाया। वर्ष 1938 में वे मुंबई गए और बॉम्बे टॉकीज के लिए पटकथा लेखन किया। वर्ष 1952 में मुंबई छोड़कर पुणे में रहने लगे और साहित्य साधना में जुट गए।
बंगाली साहित्य में शरदिंदु प्रमुख कथाकारों में शामिल हैं। ‘ब्योमकेश बक्शी’ के अलावा उन्होंने ऐतिहासिक, सामाजिक और अलौकिक विषयों पर भी कई चर्चित रचनाएं लिखीं। ‘झिंदेर बंदी’, ‘तुंगभद्रार तीरे’, ‘कालेर मंदिरा’, ‘गौर मल्लार’, ‘जातिस्मर’ और ‘विषेर धोय्यां’ उनकी उल्लेखनीय कृतियों में शामिल हैं।
शरदिंदु ने ब्योमकेश बक्शी को केंद्र में रखकर कुल 33 कहानियां लिखीं। वर्ष 1932 में पहली बार ब्योमकेश का परिचय पाठकों से हुआ। 22 सितंबर 1970 को शरदिंदु बंद्योपाध्याय का निधन हुआ।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में करम परब के अवसर पर सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं। करम परब विशेष रूप से जनजातीय समाज का महत्वपूर्ण पर्व है और पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में इसे पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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