कोलकाता, 19 सितंबर । पश्चिम बंगाल में नई सरकार गठन के बाद फसल बीमा योजना के अंतर्गत 32 लाख किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। इस आंकड़े के साथ पश्चिम बंगाल पूरे देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया हैंडल एक्स के माध्यम से यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फसल बीमा योजना के लिए पंजीकरण के पहले ही चरण में किसानों की ओर से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है। हालिया बाढ़ से प्रभावित किसानों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 2026 के खरीफ मौसम में त्वरित कदम उठाए गए हैं। 15 सितंबर 2026 तक एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत कुल 32 लाख किसानों को इस बीमा योजना के दायरे में लाया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि बाढ़ प्रभावित जिलों में किसानों के पंजीकरण को लेकर भी आंकड़े काफी सकारात्मक रहे हैं। विशेष रूप से पूर्व मेदिनीपुर में 7.23 लाख, पश्चिम मेदिनीपुर में 4.73 लाख, हुगली में 1.68 लाख और झाड़ग्राम में 42 हजार किसानों का सफलतापूर्वक पंजीकरण किया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों की सुविधा के लिए अगस्त से 15 सितंबर तक हर ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए गए थे, ताकि उन्हें सीधे बीमा कवर के तहत लाकर नुकसान के मुआवजे का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।
किसानों पर से आर्थिक बोझ कम करने के लिए राज्य सरकार प्रीमियम का अधिकांश हिस्सा अपने बजट से वहन कर रही है। नए नियमों के अनुसार, एक हेक्टेयर (ढाई एकड़) तक की कृषि भूमि वाले किसानों को केवल एक रुपये की प्रतीकात्मक राशि का भुगतान करना होगा। वहीं, एक से दो हेक्टेयर जमीन वाले किसानों को प्रति एकड़ केवल सौ रुपये का मामूली शुल्क देना होगा। इसके अलावा, बाकी का पूरा प्रीमियम सीधे राज्य सरकार द्वारा चुकाया जाएगा।
शुभेंदु ने कहा कि अगस्त 2026 की बाढ़ से प्रभावित किसानों तक जल्द से जल्द मुआवजा पहुंचाने के लिए बीमा कंपनियों को मध्यवर्ती नुकसान का मूल्यांकन तुरंत पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, बैंकों के माध्यम से ऋण लेने वाले किसानों के पंजीकरण की अंतिम समय सीमा 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है, जिससे पंजीकरण की संख्या में और बड़ी वृद्धि होने की उम्मीद है। —-
