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कोलकाता, 18 सितंबर । पश्चिम बंगाल के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में अब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, योगदान और विरासत को शामिल किया जाएगा। यह व्यवस्था साल 2027 के शैक्षणिक सत्र से लागू करने की तैयारी है।

इस संबंध में 13 अगस्त को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के आयोजन के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में निर्णय लिया गया था।

राज्य के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने शुक्रवार को स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। विभाग की ओर से कहा गया है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, योगदान और विरासत से जुड़े विषयों को स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रम में उचित रूप से शामिल किया जाए। शैक्षणिक संस्थानों से इस दिशा में जल्द कार्रवाई कर रिपोर्ट भी मांगी गई है।

सरकार ने केवल पाठ्यक्रम तक ही सीमित नहीं रहने बल्कि स्कूल और कॉलेजों में विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने को भी कहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, उनके विचारों, योगदान और बंगाल के इतिहास में उनकी भूमिका से परिचित कराने की योजना है।

सिलेबस-कम-करिकुलम समिति के अध्यक्ष प्रो. देबाशीष चटर्जी ने कहा कि इसे अकादमिक नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान और उसके ऐतिहासिक महत्व को समझने का अवसर मिलना चाहिए, जिससे वे बंगाल के इतिहास, समाज और विकास को व्यापक संदर्भ में समझ सकें।

राज्य सरकार ने राष्ट्रीय पुस्तकालय को श्यामा प्रसाद मुखर्जी से संबंधित पुस्तकों, दस्तावेजों, ऐतिहासिक अभिलेखों और अन्य सामग्री को एकत्रित कर संरक्षित करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके जीवन और कार्यों से संबंधित सामग्री का स्थायी संग्रह तैयार करना है।

सरकार संसद के रिकॉर्ड में उपलब्ध श्यामा प्रसाद मुखर्जी के भाषणों, बहसों और अन्य दस्तावेजों को भी नियमों और आवश्यक अनुमति के तहत हासिल करने की संभावनाएं तलाश रही है।

उच्चस्तरीय समिति ने श्रीलंका, कंबोडिया और म्यांमार के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के साथ अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग की संभावनाएं तलाशने की भी सिफारिश की है। इसके तहत श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर अकादमिक चेयर स्थापित करने और उनसे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं सामग्री को संरक्षित करने की संभावना है।

इसके अलावा राज्य के चिन्हित स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के परिसरों में उचित स्थान पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा, मूर्ति या अन्य स्मारक स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।