पूर्वी सिंहभूम, 15 सितंबर । अखिल भारतीय गंडा समाज ने नुआखाई पर्व के अवसर पर झारखंड में गंडा जाति को अनुसूचित जाति (एससी) की सूची में शामिल करने और नुआखाई के दिन सरकारी अवकाश घोषित करने की मांग उठाई है। समाज के केंद्रीय महासचिव कुंज विभार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से दोनों मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल करने की अपील की है।
कुंज विभार ने मंगलवार को कहा कि नुआखाई पश्चिमी ओडिशा सहित उत्कल संस्कृति से जुड़े क्षेत्रों का प्रमुख पारंपरिक लोकपर्व है। झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों के अलावा राज्य के विभिन्न हिस्सों में भी बड़ी संख्या में लोग इसे पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। यह पर्व कृषि और प्रकृति से गहरे जुड़ा है तथा नई फसल के लिए कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पंचमी को मनाए जाने वाले नुआखाई का शाब्दिक अर्थ नया अन्न ग्रहण करना है। इस अवसर पर धान की नई फसल से तैयार अन्न सबसे पहले देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है। इसके बाद परिवार के सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं और नवान्न भोज का आयोजन किया जाता है। पर्व के दौरान घरों की साफ-सफाई, नए वस्त्र धारण करना, पारंपरिक व्यंजन तैयार करना और एक-दूसरे को ‘नुआखाई जुहार’ कहकर शुभकामनाएं देना प्रमुख परंपराओं में शामिल है।
विभार ने कहा कि झारखंड में भी नुआखाई की सामाजिक और सांस्कृतिक स्वीकार्यता लगातार बढ़ी है। बड़ी संख्या में लोग इस पर्व को अपनी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान के हिस्से के रूप में मनाते हैं। ऐसे में पर्व के महत्व को देखते हुए राज्य सरकार को नुआखाई के दिन सरकारी अवकाश घोषित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गंडा समाज को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की पहल के साथ नुआखाई पर सरकारी अवकाश की घोषणा समाज के लिए महत्वपूर्ण सम्मान और सौगात होगी। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से दोनों मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।
