हथियार बरामद

सचिन, मीता और गौरी से मिले इनपुट के बाद रोलाहातु में संयुक्त सर्च अभियान, हथियारों का जखीरा मिलने की सूचना

सरायकेला, 11 सितंबर। पश्चिम बंगाल में तीन इनामी माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद सरायकेला-खरसावां के नक्सल प्रभावित कुचाई इलाके में सुरक्षा बलों ने बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुचाई थाना क्षेत्र के रोलाहातु जंगल में सरायकेला-खरसावां पुलिस, कोबरा और पश्चिम बंगाल पुलिस की संयुक्त टीम तलाशी अभियान चला रही है। अभियान के दौरान जंगल से बड़ी मात्रा में हथियार और अन्य नक्सली सामग्री बरामद होने की सूचना है। अभियान जारी रहने के कारण पुलिस ने बरामदगी का पूरा ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं किया है।

बताया जा रहा है कि यह अभियान पश्चिम बंगाल में आत्मसमर्पण करने वाले तीन माओवादियों से मिली जानकारी के बाद शुरू किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रीजनल कमेटी सदस्य रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, उसकी पत्नी एवं जोनल कमेटी सदस्य मीता उर्फ नयनतारा तथा सब-जोनल कमेटी सदस्य गौरी उर्फ बुल्लू ने पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है।

सचिन पर झारखंड सरकार की ओर से 15 लाख रुपये और मीता पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। तीनों लंबे समय से झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। सचिन का नाम पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड से भी जुड़ा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस हत्याकांड के बाद से वह करीब दो दशक तक सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा।

पूछताछ से मिले इनपुट पर तलाशी

पुलिस रिकॉर्ड पर आधारित रिपोर्टों के अनुसार, सचिन के खिलाफ 44, मीता के खिलाफ 19 और गौरी के खिलाफ 18 मामले दर्ज हैं। इनमें मुठभेड़, आईईडी विस्फोट और सुरक्षा बलों पर हमले से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर रोलाहातु के जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। संयुक्त टीम जंगल के विभिन्न हिस्सों में तलाशी ले रही है। इस दौरान हथियारों और अन्य सामग्री की बरामदगी की सूचना है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितने हथियार और किस तरह के हथियार बरामद हुए हैं। पुलिस की ओर से आधिकारिक बरामदगी सूची जारी होने के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी।

ऑपरेशन पूरा होने के बाद सामने आ सकता है पूरा ब्योरा

तीन वरिष्ठ माओवादियों के आत्मसमर्पण के तुरंत बाद कुचाई के जंगल में शुरू हुआ यह अभियान सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तलाशी अभियान के दौरान संभावित नक्सली डंप, हथियार और गोला-बारूद की तलाश की जा रही है।

यदि पुलिस आधिकारिक तौर पर बरामदगी को आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिले इनपुट से जोड़कर पुष्टि करती है, तो इससे झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क और उनके ठिकानों के संबंध में सुरक्षा बलों को महत्वपूर्ण जानकारी मिलने के संकेत मिल सकते हैं। फिलहाल जंगल में सर्च ऑपरेशन जारी है और अभियान पूरा होने के बाद बरामदगी का विस्तृत ब्योरा सामने आने की उम्मीद है।