tulu

कोलकाता, 20 अगस्त । बीरभूम के चर्चित पत्थर कारोबारी टूलू मंडल को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को अदालत ने गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी । न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने पुलिस जांच में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि मामले की जांच जारी रहनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान टूलू मंडल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने दलील दी कि घर में नकदी और सोना रखना भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध नहीं है। इसके लिए आयकर कानून के तहत मामला हो सकता है। इस पर न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि बरामद रकम कम नहीं, बल्कि बहुत बड़ी है।

नकदी और सोने की बरामदगी के मामले में संगठित अपराध से जुड़ी धाराएं लगाए जाने पर टूलू के वकील ने सवाल उठाया। इस पर अदालत ने कहा कि अगर धाराओं को लेकर आपत्ति है तो मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि अदालत का मानना है कि इस मामले की जांच आगे जारी रहनी चाहिए और जांच अधिकारियों के काम में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मामले से संबंधित एक गोपनीय रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गई। अतिरिक्त महाधिवक्ता बिल्वदल भट्टाचार्य ने अनुरोध किया कि रिपोर्ट की जानकारी कहीं और सार्वजनिक न हो। न्यायमूर्ति ने रिपोर्ट का अवलोकन किया।

दरअसल, हाल ही में बीरभूम के मोहम्मदबाजार थाना क्षेत्र के देउचा गांव में टूलू के रिश्तेदार मिनार मंडल के घर से करीब 28.5 करोड़ रुपये नकद और 15 किलोग्राम सोना बरामद किया गया था। पुलिस ने मिनार मंडल को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन टूलू मंडल का पता नहीं चल सका। उनकी कई संपत्तियां भी जब्त की गई हैं।

गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए टूलू ने पहले न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ में सुरक्षा कवच की मांग की थी। इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देने और संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए न्यायमूर्ति कौशिक चंद की पीठ का रुख किया था। हालांकि, एक अन्य पीठ में मामला लंबित होने के कारण न्यायमूर्ति चंद ने उस मामले से खुद को अलग कर लिया था।

टूलू मंडल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट के अलावा इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है। सिउड़ी की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें शुक्रवार सुबह तक अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। आदेश के मुताबिक निर्धारित समय तक पेश नहीं होने पर उन्हें घोषित अपराधी माना जा सकता है।