राज्यपाल

रांची, 17 अगस्त । झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि आज महिलाएं जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दे रही हैं। विज्ञान, खेल, प्रशासन, उद्योग, शिक्षा एवं सामाजिक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियां देश के लिए गौरव का विषय हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में नारी को शक्ति, सृजन और संस्कार की वाहक के रूप में देखा गया है। इतिहास में अनेक महिलाओं ने अपने समय की सीमाओं से आगे बढ़कर समाज और राष्ट्र को दिशा दी है।

राज्यपाल सोमवार को रांची के ऑड्रे हाउस में डॉ. शोभा विजेन्द्र की ओर से लिखित पुस्तक ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ की परिचर्चा के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ पुस्तक एक शताब्दी की यात्रा के संदर्भ में महिलाओं की सहभागिता और समाज-निर्माण में उनकी भूमिका को समझने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने पुस्तक की लेखिका डॉ. शोभा विजेन्द्र को इस कृति के लिए बधाई देते हुए कहा कि पुस्तक केवल शब्दों का संकलन नहीं होती, बल्कि वह किसी समय के अनुभव, विचार और संवेदना को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम होती है।

राज्यपाल ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान किया जा रहा है। इसका प्रभावी क्रियान्वयन अभी आगे की संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़ा है। प्रधानमंत्री ने सभी पक्षों से इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया है। राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने से वे देश की नीतियों और विकास की दिशा तय करने में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ की यात्रा में नारी शक्ति की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने निकट से देखा है कि पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाएं अपने दायित्वों का कुशलता एवं संवेदनशीलता के साथ निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि निर्णय-प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से विकास में संवेदना जुड़ती है और विकास अधिक मानवीय बनता है। उन्होंने कहा कि महिला सहभागिता की शुरुआत परिवार से होती है और उसका प्रभाव समाज एवं राष्ट्र तक पहुंचता है। एक शिक्षित महिला आने वाली पीढ़ी की दिशा को प्रभावित करती है, वहीं एक आत्मनिर्भर महिला परिवार और समाज में आत्मविश्वास तथा परिवर्तन की नई चेतना उत्पन्न करती है।

राज्यपाल ने डॉ. शोभा विजेन्द्र के महिला एवं बाल कल्याण, सामाजिक सेवा, शिक्षा एवं पर्यावरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनके अनुभवों की व्यापकता इस पुस्तक को विशिष्ट दृष्टि प्रदान करती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नई पीढ़ी के लिए उपयोगी सिद्ध होगी तथा महिला सहभागिता के विभिन्न आयामों पर सार्थक चिंतन को प्रेरित करेगी।