आरकेडीएफ विश्‍वविद्यालय

सभी विभागों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के बीच संस्कृति, परंपरा और आदिवासी गौरव की दिखी जीवंत झलक

रांची, 8 अगस्‍त। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आरकेडीएफ विश्‍वविद्यालय रांची में  आदिवासी संस्कृति, परंपरा, कला और गौरवशाली विरासत को समर्पित एक भव्य एवं रंगारंग कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में सभी विभागों के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई, जिससे पूरा परिसर आदिवासी संस्कृति और सांस्कृतिक विविधता के रंग में रंगा नजर आया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी ज्ञान, संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उसके महत्व को पहुंचाना रहा। साथ ही विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने तथा झारखंड की समृद्ध जनजातीय पहचान को समझने का अवसर प्रदान करना भी आयोजन का महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने  पारंपरिक पोशाक, नृत्य प्रतियोगिता, गीत प्रतियोगिता, फूड स्टॉल, पोस्टर प्रस्तुति और ड्राइंग प्रतियोगिता  सहित विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पारंपरिक परिधानों में सजे विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति से झारखंड की जनजातीय संस्कृति की खूबसूरती को जीवंत कर दिया।

आदिवासी नृत्‍य और लोकसंगीत  की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया। वहीं  पारंपरिक व्यंजनों की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया गया। पोस्टर प्रस्तुति, ड्राइंग तथा आदिवासी कला और शिल्प के माध्यम से विद्यार्थियों ने आदिवासी जीवन, प्रकृति, परंपरा और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में पारंपरिक पोशाक, आदिवासी नृत्य, लोक संगीत, स्वदेशी व्यंजन और आदिवासी कला और शिल्प की झलक ने यह संदेश दिया कि आदिवासी संस्कृति केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हमारी सामूहिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज ने सदियों से प्रकृति संरक्षण, जल-जंगल-जमीन के प्रति संवेदनशीलता, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक जीवन मूल्यों के माध्यम से समाज को महत्वपूर्ण दिशा दी है। आदिवासी संस्कृति की सादगी, प्रकृति के साथ उसका गहरा संबंध और समृद्ध परंपराएं आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी हैं।

कार्यक्रम में यह संदेश भी प्रमुखता से उभरा कि आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी यदि अपनी संस्कृति, भाषा, कला और परंपराओं को समझे और आगे बढ़ाए, तो हमारी विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकती है।

विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी पहचान, अपनी जड़ों और अपनी गौरवशाली विरासत को समझने एवं सम्मान देने का एक सार्थक मंच बना। सभी विभागों की सामूहिक भागीदारी ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाया तथा विश्वविद्यालय परिसर में एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की।

कार्यक्रम के सफल आयोजन ने यह साबित किया कि आरकेडीएफ विश्‍वविद्यालय रांची  शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।

अंत में आरकेडीएफ विश्‍वविद्यालय रांची  परिवार की ओर से समस्त आदिवासी समाज को विश्व आदिवासी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी गईं।

“हमारी जड़ें हमारी ताकत हैं, हमारी संस्कृति हमारी पहचान है और हमारी विरासत हमारा गौरव है।”