रांची, 8 अगस्त। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और गड़बड़ी के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शनिवार को रांची में जोरदार प्रदर्शन किया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय परिसर से निकला छात्र मार्च मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ा। सिदो-कान्हू पार्क के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान बैरिकेड्स पार करने की कोशिश को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने 8 से 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर लालपुर थाना भेज दिया।

पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय अजय आर्यन ने बताया कि एबीवीपी कार्यकर्ता विश्वविद्यालय से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे थे। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए उन्हें सिदो-कान्हू पार्क के पास रोकने का प्रयास किया गया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की। इसके बाद कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
हिरासत में लिए गए लोगों में एबीवीपी के प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी, प्रदीप शेखावत और पशुपतिनाथ उपमन्यु समेत कई कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, संगठन की ओर से हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और नामों को लेकर अलग सूची जारी की गई है।
एबीवीपी ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की
एबीवीपी ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए दावा किया कि छात्र मार्च शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से निकाला गया था। संगठन का आरोप है कि जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठा रहे विद्यार्थियों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने के बजाय प्रशासन ने बलपूर्वक कार्रवाई की।
एबीवीपी ने कहा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर संगठन पहले ही राज्यपाल को ज्ञापन सौंप चुका है। इसके अलावा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में हस्ताक्षर अभियान और जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन भी किए गए हैं। शनिवार का मार्च इसी आंदोलन की अगली कड़ी था।
संदिग्ध परीक्षाएं रद्द कर दोबारा कराने की मांग
एबीवीपी ने मांग की है कि जिन जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं, उन्हें रद्द कर पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत दोबारा आयोजित किया जाए। संगठन ने प्रश्नपत्र लीक और अन्य कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार और परीक्षा संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक विद्यार्थी को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मांगों पर संवाद करने के बजाय आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
‘विद्यार्थियों की आवाज नहीं दबाई जा सकती’
एबीवीपी झारखंड के प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के कारण हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने सरकार से विद्यार्थियों की मांगों पर तत्काल संवाद कर समाधान निकालने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। एबीवीपी ने इसी मुद्दे को लेकर 11 अगस्त को झारखंड विधानसभा मार्च का आह्वान किया है। संगठन ने राज्य के विद्यार्थियों, युवाओं और महिलाओं से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने की अपील की है।
एबीवीपी कार्यकर्ता अभिनव यादववंशी ने कहा कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों को लेकर विद्यार्थियों में लगातार आक्रोश है। उन्होंने कहा कि संगठन कार्यकर्ता आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और मांगों पर सुनवाई नहीं होने पर 11 अगस्त को विधानसभा मार्च किया जाएगा।
