डिजिटल बीट पुलिसिंग

पूर्वी सिंहभूम, 03 अगस्त । अपराध नियंत्रण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में जमशेदपुर पुलिस ने सोमवार को क्यूआर कोड आधारित डिजिटल बीट पुलिसिंग प्रणाली की शुरुआत की।

इस नई व्यवस्था के माध्यम से पुलिस गश्त की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे प्रत्येक बीट क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता सुनिश्चित हो सकेगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक बीट पुलिसिंग के समन्वय से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वरीय पुलिस अधीक्षक एहतेशाम वकारिब, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शुभम खंडेलवाल, सिटी एसपी ललित कुमार मीणा सहित जिले के अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद थेे। अधिकारियों ने स्वयं पुलिस पदाधिकारियों और अन्य पुलिसकर्मियों को नई डिजिटल प्रणाली का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान क्यूआर कोड स्कैनिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग, बीट मॉनिटरिंग और गश्ती व्यवस्था के संचालन की विस्तृत जानकारी दी गई, ताकि नई प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

नई व्यवस्था के तहत पूरे जिले को 206 बीट क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। इनमें 102 शहरी और 104 ग्रामीण बीट शामिल हैं। प्रत्येक बीट में एक बीट पदाधिकारी की तैनाती की गई है, जो नियमित गश्त करने, स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करने, अपराध संबंधी सूचनाएं एकत्र करने तथा अपने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

जमशेदपुर पुलिस ने पिछले पांच वर्षों के अपराध आंकड़ों का विश्लेषण कर ऐसे स्थानों की पहचान की है, जहां अपराध की आशंका अधिक रहती है। इन स्थानों के अलावा प्रमुख बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, परिवहन केंद्रों और संवेदनशील इलाकों में भी क्यूआर कोड लगाए गए हैं, ताकि गश्त की वास्तविक स्थिति डिजिटल रूप से दर्ज हो सके।

नई प्रणाली के अनुसार टैंगो वाहन, पीसीआर और थाना गश्ती दल प्रत्येक ड्यूटी शिफ्ट के दौरान निर्धारित क्यूआर कोड को कम से कम दो बार स्कैन करेंगे। इसके साथ ही प्रत्येक बीट पदाधिकारी को प्रतिदिन पैदल या बाइक से अपने क्षेत्र का भ्रमण करना होगा। विशेष रूप से शाम पांच बजे से रात आठ बजे तक क्षेत्र में उनकी सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्यूआर कोड स्कैन होते ही गश्त का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल पोर्टल पर दर्ज हो जाएगा, जिससे वरिष्ठ अधिकारी किसी भी समय गश्त की स्थिति की निगरानी कर सकेंगे। इससे पुलिसकर्मियों की जवाबदेही बढ़ेगी, संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पुलिस उपस्थिति बनी रहेगी और किसी भी आपराधिक घटना पर त्वरित कार्रवाई करने में आसानी होगी।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल बीट पुलिसिंग से सामुदायिक पुलिसिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय लोगों के साथ बेहतर संवाद स्थापित होगा, अपराध संबंधी सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव होगा और पुलिस व आम जनता के बीच विश्वास और सहयोग का दायरा और मजबूत होगा।