बनई नदी का डायवर्सन फिर जर्जर

खूंटी, 24 जुलाई । खूंटी–सिमडेगा मुख्य मार्ग पर बनई नदी पर बनाया गया डायवर्सन एक बार फिर खतरे की जद में आ गया है। हल्की बारिश के बाद ही डायवर्सन के कई हिस्सों में कटाव और क्षति के निशान दिखाई देने लगे हैं। स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि अगले कुछ दिनों तक लगातार तेज बारिश हुई तो डायवर्सन क्षतिग्रस्त हो सकता है, जिससे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित होने का खतरा पैदा हो जाएगा। 30 जुलाई से शुरू होने वाले बाबा आम्रेश्वर धाम के प्रसिद्ध श्रावणी मेले को देखते हुए यह चिंता और बढ़ गई है।

दरअसल, 19 जून 2025 को भारी बारिश के दौरान बनई नदी पर बना पुल ध्वस्त हो गया था। इसके बाद खूंटी–सिमडेगा मार्ग पर यातायात पूरी तरह बंद हो गया और लोगों को कई महीनों तक लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा। इससे आम लोगों, व्यापारियों, छात्रों और मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

करीब छह माह बाद प्रशासन ने लगभग 1.80 करोड़ रुपये की लागत से नदी पर डायवर्सन का निर्माण कराया, जिससे इस मार्ग पर फिर से यातायात शुरू हो सका। हालांकि, निर्माण के कुछ ही महीनों बाद इसकी स्थिति बिगड़ने लगी। शुरुआती बारिश में ही कई स्थानों पर कटाव दिखाई देने लगा है और सड़क की सतह भी कमजोर पड़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर बढ़ा तो डायवर्सन बहने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

जेएलएम के जिलाध्यक्ष कुमार ब्रजकिशोर ने आरोप लगाया कि 1.80 करोड़ रुपये की लागत से बना डायवर्सन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। वहीं, स्थानीय निवासी विश्वनाथ उरांव ने कहा कि खूंटी, सिमडेगा और रांची को जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही का माध्यम है। यदि डायवर्सन बंद हो गया तो यात्रियों के साथ-साथ मालवाहक वाहनों का परिचालन भी प्रभावित होगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ेगा।

स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता आगामी श्रावणी मेले को लेकर है। बाबा आम्रेश्वर धाम में सावन के दौरान झारखंड सहित पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में कांवरिया और श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। लोगों का कहना है कि यदि मेले के दौरान डायवर्सन क्षतिग्रस्त हो गया तो श्रद्धालुओं को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वैकल्पिक सड़कें भी जर्जर स्थिति में हैं, जिससे आवागमन और अधिक कठिन हो सकता है। इसका असर मेले की व्यवस्थाओं के साथ-साथ स्थानीय व्यापार पर भी पड़ने की आशंका है।

ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से डायवर्सन की तत्काल तकनीकी जांच कर आवश्यक मरम्मत कराने, बारिश के दौरान इसकी लगातार निगरानी सुनिश्चित करने तथा स्थायी पुल के निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में लोगों को ऐसी परेशानी से बचाने के लिए स्थायी समाधान आवश्यक है।

पुल निर्माण की प्रक्रिया जारी : अभियंता

पथ निर्माण विभाग के अभियंता अमित कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले ही डायवर्सन की मरम्मत कराई गई है। उन्होंने कहा कि नए पुल के निर्माण के लिए लगभग सात करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार कर लिया गया है और शीघ्र ही निर्माण कार्य के लिए निविदा जारी की जाएगी।