रांची, 12 मई। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) रहे अधिकारी की मुख्य सचिव पद पर नियुक्ति को लेकर उठे विवाद को अनुचित बताया है।
मरांडी ने कहा विपक्ष इस नियुक्ति को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी की नियुक्ति निर्वाचित सरकार के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत होती है। यदि नियुक्ति नियमानुसार और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप की गई है, तो आरोप लगाना उचित नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2019 में कांग्रेस, झामुमो और राजद गठबंधन की सरकार बनने के समय विनय चौबे मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में चुनाव प्रक्रिया का संचालन कर रहे थे। बाद में मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रधान सचिव नियुक्त किया, लेकिन उस समय भाजपा ने कभी यह आरोप नहीं लगाया कि किसी अधिकारी की भूमिका के कारण जनादेश प्रभावित हुआ।
मरांडी ने कहा कि भाजपा ने हमेशा लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के जनादेश का सम्मान किया है। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना, जांच एजेंसियों पर पक्षपात के आरोप लगाना और हर प्रशासनिक निर्णय को राजनीतिक रंग देना कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, झामुमो, आम आदमी पार्टी और उनके सहयोगी दलों की पुरानी प्रवृत्ति बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और स्वस्थ राजनीतिक परंपरा की पहचान यही है कि जनादेश को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया जाए।
