समर्पण ट्रस्‍ट

 ‘पंडित युगल किशोर शुकुल समर्पण पत्रकारिता शिरोमणि सम्मान’  विश्वंभर नेवर को

कोलकाता, 9 जून। हिंदी पत्रकारिता के प्रथम समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समर्पण ट्रस्ट, कोलकाता की ओर से रोटरी सदन में “स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी समाचार पत्रों की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना एवं वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इस अवसर पर हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ पत्रकार विश्वंभर नेवर को ‘पंडित युगल किशोर शुकुल समर्पण पत्रकारिता शिरोमणि सम्मान’ से सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों, पत्रकारों, शोधार्थियों तथा बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष पर अपनी शुभकामनाएं भेजते हुए पत्रकारिता के लोकतांत्रिक महत्व को रेखांकित किया।

समर्पण ट्रस्ट के उपाध्यक्ष अभिषेक डोकानिया ने स्वागत भाषण में कहा कि कोलकाता हिंदी पत्रकारिता की जन्मभूमि रही है और उदन्त मार्तण्ड’ केवल एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि भारतीय बहुभाषिकता, सांस्कृतिक अस्मिता, लोककल्याण, सत्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक है। उन्होंने इसकी गौरवशाली परंपरा ने समाज में जनचेतना और निष्पक्ष पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी।

मुख्य अतिथि प्रो. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के वर्तमान को समझने के लिए उसके इतिहास को जानना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उदन्त मार्तण्ड’ के इतिहास को संरक्षित रखने में बंगाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पत्रकारिता केवल घटनाओं का दस्तावेज नहीं, बल्कि समय और समाज को समझने का प्रभावी माध्यम भी है।

अदिति महाविद्यालय, दिल्ली की प्राचार्या डॉ. नीलम राठी ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य राष्ट्रहित में निष्पक्षता बनाए रखना है।

कलकत्ता विश्वविद्यालय की प्रो. राजश्री शुक्ला ने कहा कि पत्रकारिता ने समाज में साहित्य, संस्कार और जीवन-मूल्यों के संरक्षण का कार्य किया है। समाज निर्माण में उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षाविद् प्रो. राममोहन पाठक ने कहा कि उदन्त मार्तण्ड’ अपने समय का समग्र समाचार पत्र था, जिसमें समाज, राजनीति और जनजीवन से जुड़े विविध विषयों को स्थान मिलता था।

सम्मान प्राप्त करने के बाद वरिष्ठ पत्रकार विश्वंभर नेवर ने कहा कि पत्रकारिता का दायित्व केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना भी है। उन्होंने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय पत्रकारों ने अनेक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहे।

प्रथम सत्र की अध्यक्षता कर रही प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने कहा कि पत्रकारिता ने भारत की विविध भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना और वैज्ञानिक सोच के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने समर्पण ट्रस्ट के ट्रस्टी प्रदीप ढेडिया को हिंदी एवं भाषा सेवा के क्षेत्र में समर्पित व्यक्तित्व बताया।

पत्रकार लोकनाथ तिवारी ने कहा कि पत्रकारिता को जनहित और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों को केंद्र में रखना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार रविशंकर सिंह ने कहा कि हिंदी समाचार पत्रों ने स्वाधीनता आंदोलन की वैचारिक नींव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के प्रो. सुनील द्विवेदी ने कहा कि प्रत्येक समाचार पत्र का अपना दृष्टिकोण और उद्देश्य होता है, जो उसकी कार्यशैली में स्पष्ट दिखाई देता है। वहीं पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के प्रो. किंशुक पाठक ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए कहा कि नई तकनीकें पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन ला रही हैं, लेकिन मानव मस्तिष्क की सृजनात्मकता और संवेदनशीलता का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

संगोष्ठी के द्वितीय सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं कोलकाता प्रेस क्लब के अध्यक्ष स्नेहाशीष सुर ने की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के मूल मूल्य आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

संगोष्ठी में बड़ी संख्या में पत्रकार, शिक्षाविद्, शोधार्थी, साहित्यकार, समाजसेवी तथा विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों का इतिहास केवल पत्रकारिता का इतिहास नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता संग्राम, भाषाई एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों की सशक्त गाथा है।

संगोष्ठी के दोनों सत्रों का संचालन महावीर प्रसाद रावत ने किया जबकि धन्यावाद ज्ञापन राहुल मोदी  ने किया।