कार्यशाला

बीकानेर, 11 फरवरी। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) के इतिहास विभाग द्वारा प्राचीन अभिलेखों के संरक्षण के महत्व पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ।

एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि प्राचीन ऐतिहासिक अभिलेखों का संरक्षण हमें अपने अतीत को समझने और भविष्य की दिशा तय करने में मदद करता है। अभिलेखों की सुरक्षा केवल दस्तावेजों की रक्षा नहीं, बल्कि हमारी पहचान, अस्तित्व, सभ्यता और संस्कृति के ज्ञान की रक्षा भी है।

कार्यशाला के बीज वक्ता बीकानेर राज्य अभिलेखागार के वरिष्ठ रसायनज्ञ ऋषिराज थानवी ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से अभिलेख संरक्षण की विभिन्न वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसीटोन विधि के तहत लेमिनेशन प्रक्रिया में दस्तावेज को दो फॉइल के बीच रखकर सुरक्षित किया जाता है। पुराने और पीले पड़ चुके कागज़ों को कैल्शियम बाइकार्बोनेट के प्रयोग से लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि माइक्रोफिल्म रीडर और एमआरडी-2 कैमरा जैसी तकनीकें दस्तावेजों को संरक्षित करने में सहायक हैं। अभिलेखागारों को दीमक से बचाने के लिए भवन के चारों ओर एंटी-टर्माइट लाइनें बिछाई जाती हैं। वर्तमान में व्यापक स्तर पर डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया चल रही है, जिसके अंतर्गत रिकॉर्ड्स को जेपीईजी फॉर्मेट में सुरक्षित रखा जा रहा है।

आयोजन सचिव एवं अतिथि शिक्षक डॉ. गोपाल व्यास ने मंच संचालन करते हुए कहा कि यह कार्यशाला इतिहास विषय में भविष्य निर्माण की दिशा में विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी और रोजगारपरक सिद्ध होगी। मुख्य व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों ने रोजगार संबंधी प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर देते हुए ऋषिराज थानवी ने बताया कि इतिहास अध्ययन का भविष्य उज्ज्वल है। इस क्षेत्र में सहायक पुरालेखपाल, आर्काइवल केमिस्ट, रिसर्च ऑफिसर, म्यूज़ियम क्यूरेटर जैसे पदों पर कार्य करने के अवसर उपलब्ध हैं। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को राजस्थान राज्य अभिलेखागार के ब्रोशर भी वितरित किए गए।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन अतिथि शिक्षक भगवान दास सुथार ने दिया। कार्यक्रम में डॉ. मुकेश हर्ष, डॉ. रीतेश व्यास, डॉ. खुशाल पुरोहित, रिंकू जोशी, जसप्रीत सिंह, किरण और तेजपाल भारती सहित विभाग के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यशाला में कुल 90 विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।