कोलकाता, 31 अगस्त। वरिष्ठ कवि एवं ‘शब्दवीणा’ के पश्चिम बंगाल प्रदेश संगठन मंत्री रणविजय श्रीवास्तव के निधन पर रविवार को कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज के प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेशभर के साहित्यकारों, पत्रकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने दिवंगत कवि को याद किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम का आयोजन ‘शब्दवीणा’ पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष रामनाथ बेख़बर तथा कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सत्या उपाध्याय के नेतृत्व में हुआ। श्रद्धांजलि सभा में सलकिया हिन्दी साहित्य गोष्ठी, केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद, शब्द साधना, सदीनामा, मंजरी सामयिक, सृजन मंच और बंगीय हिन्दी परिषद जैसी संस्थाओं के रचनाकार शामिल हुए। संचालन वरिष्ठ कवि जीतेन्द्र जीतांशु ने किया।

सभा में वक्ताओं ने रणविजय श्रीवास्तव के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें साहित्य जगत का स्तंभ बताया। प्रदेश सचिव राम पुकार सिंह ने उनके निधन को “शब्दवीणा और साहित्यकारों के लिए बड़ी क्षति” कहा। प्रदेश साहित्य मंत्री ज्ञान प्रकाश पांडे ने कहा कि बीमारी के दौरान भी उन्होंने अपने संकल्प और अनुशासन को निभाया। प्रदेश अध्यक्ष रामनाथ बेखबर ने उन्हें “यादों में सदा जीवित रहने वाला व्यक्तित्व” बताया।

कार्यक्रम में विभिन्न कवियों और साहित्यकारों ने कविताओं, गीतों और शायरी के माध्यम से कवि श्रीवास्तव को स्मरण किया। चंद्रिका प्रसाद पांडेय ‘अनुरागी’ के गीत उठे और चुपचाप चल दिये छोड़ अधूरे गीत ने सभी को भावुक कर दिया। डॉ. शाहिद फारोगी ने शायरी में श्रद्धांजलि दी, वहीं जीवन सिंह ने उनके भोजपुरी गीतों के प्रति लगाव को याद किया। गजेंद्र नाहटा ने कवि की रचना रौशनी के वास्ते सूरज का किया नहीं इंतजार पढ़ी, तो रंजीत भारती, अमित अंबष्ट और नंदलाल रौशन ने अपनी कविताओं से भावांजलि दी।

सभा में प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी, पुरुषोत्तम तिवारी, डॉ. कमलेश जैन सहित कई साहित्यकारों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपने उद्गार प्रेषित किए। सभी ने रणविजय श्रीवास्तव को हंसमुख, सहयोगी, मित्रवत और जिंदादिल व्यक्तित्व का धनी बताते हुए उनके निधन को समाज, साहित्य और संगीत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

अंत में कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सत्या उपाध्याय ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी संस्थानों और रचनाकारों का आभार जताया और कहा कि रणविजय श्रीवास्तव की स्मृतियाँ साहित्यजगत के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।