राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड ने मंजूर किए 85 करोड़

लखनऊ, 27 मार्च । उत्तर प्रदेश में अयोध्या, काशी, मथुरा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) अंतर्गत आने वाले अन्य पर्यटन स्थल भी शीघ्र ही पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनेंगे। केंद्र सरकार ने इसके लिए बड़ी तैयारी की है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड ने इसके लिए 85 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। गाजियाबाद, बुलंदशहर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़ आदि जिलों के महत्वपूर्ण धार्मिक-आध्यात्मिक, ऐतिहासिक सहित अन्य स्थलों पर पर्यटक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटन में देश में पहले स्थान पर है। विदेशी पर्यटन में भी यह उपलब्धि हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी दृष्टिकोण से निरंतर पर्यटन स्थलों और पर्यटक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इसी क्रम में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) ने मुजफ्फरनगर में शुकतीर्थ के एकीकृत पर्यटन विकास- साउंड एंड लाइट शो के लिए लगभग 12.68 करोड़ रुपये, मेरठ में 1857 के क्रांति स्थलों और शहीद स्मारक के पर्यटन विकास के लिए लगभग 4.53 करोड़ रुपये, हस्तिनापुर के समेकित पर्यटन विकास के लिए लगभग 15.04 करोड़ रुपये, सरधना के पर्यटन विकास के लिए लगभग 4.54 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी तरह बुलंदशहर स्थित मां अवंतिका देवी मंदिर के पर्यटन विकास के लिए लगभग 11.37 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। गाजियाबाद के दूधेश्वर नाथ मंदिर के पर्यटन विकास के लिए लगभग 5.52 करोड़ रुपये सहित एक अन्य योजना का पर्यटन विकास किया जाएगा। इसके अलावा, हापुड़ और मुजफ्फरनगर में पहले से निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए भी धनराशि जारी की गई है।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसे अनेक स्थल हैं, जिनका पर्यटन की दृष्टि से विशेष महत्व है। मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ स्थित वट वृक्ष के नीचे शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को पहली बार श्रीमद्भागवत कथा सुनाई थी। इसी प्रकार गाजियाबाद, बुलंदशहर, मेरठ, हापुड़ सहित अन्य जनपदों में ऐसे अनेक स्थल हैं, जिनका अपना सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक महत्व है। पर्यटन की असीम संभावनाओं को देखते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार प्राथमिकता के आधार पर पर्यटन सुविधाओं का विकास कर रही है।