नई दिल्ली, 4 अप्रैल । सरकार ने देश की बंदरगाह क्षमता को मौजूदा 2,600 एमटीपीए (मीट्रिक टन प्रति वर्ष) से बढ़ाकर 2047 तक 10,000 एमटीपीए करने का लक्ष्य रखा है। सरकार की इस रणनीतिक पहल का उद्देश्य भारत को एक अग्रणी समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करना है। यह जानकारी केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।

इसमें बताया गया कि गहरे जल वाले बंदरगाहों के साथ नए बंदरगाहों का विकास करना, मौजूदा बंदरगाहों की गहराई को बढ़ाना, बंदरगाह क्लस्टर और ट्रांसशिपमेंट हब स्थापित करना, स्वचालित बंदरगाहों का विकास करना, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना और नीति समर्थन को बढ़ाना इस रणनीति की कुंजी है। केंद्र सरकार ने भारत की समुद्री क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कई विधायी सुधार पेश किए हैं। इनमें प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण अधिनियम, 2021, नौवहन के लिए समुद्री सहायता अधिनियम, 2021, अंतर्देशीय पोत अधिनियम, 2021, तटीय व्यापार नियमों (कैबोटेज) में ढील, 2018, जहाजों का पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019, राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016, बंदरगाह पर निर्भर उद्योगों को जलक्षेत्र और संबद्ध भूमि देने की नीति (कैप्टिव नीति), 2016 और प्रमुख बंदरगाहों पर संकटग्रस्त सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं से निपटने के लिए दिशानिर्देश शामिल हैं।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम (जीटीटीपी) शुरू किया है। इसका उद्देश्य पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ टगबोट संचालन को अपनाने को प्रोत्साहित कर कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने प्रमुख बंदरगाहों के लिए हरित सागर दिशा-निर्देश और अंतर्देशीय जहाजों के लिए हरित नौका दिशा-निर्देश शुरू किए हैं, जिनका उद्देश्य हरित प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देना है।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय वैश्विक समुद्री भारत शिखर सम्मेलन, सागरमाथन, चिंतन शिविर, बजट के बाद उद्योग सम्मेलन और हितधारक परामर्श जैसे उच्च स्तरीय आयोजनों के माध्यम से समुद्री नीतियों को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम विधियों के साथ जोड़ता है। यह नीति निर्माताओं, उद्योग और जमीनी स्तर के समुदायों के बीच संवाद को बढ़ावा देता है। वैश्विक समुद्री दिग्गजों के साथ नियमित जुड़ाव और अंतरराष्ट्रीय मंचों में भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि भारत की नीतियां वैश्विक मानकों के अनुरूप हों, जिससे भारत समुद्री क्षेत्र में एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित हो।