पालमपुर, 5 अप्रैल । पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के दो न्यायधीशों के व्यवहार के कारण पूरे देश की न्यायपालिका पर सवाल खड़ा हो गया है। इन घटनाओं ने देशभर में जनता के बीच चिंता और गुस्सा पैदा कर दिया है।

शांता कुमार ने शनिवार काे एक बयान में कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय में एक बंद घर में आग लगी थी, जिसके दौरान बोरियों में 16 करोड़ रुपये के अधजले नोट पाए गए। यह सवाल उठता है कि जज के घर में इतने पैसे कहां से आए और क्यों? यह घटना चिंता का कारण बन गई है और पूरे देश में इस पर चर्चा हो रही है। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें एक 11 साल की नाबालिग लड़की के साथ दुर्व्यवहार से संबंधित मामले में न्यायधीश ने यह कहा था कि किसी लड़की के निजी अंगों को पकड़ना और सलवार का नाड़ा खोलने की कोशिश करना, दुष्कर्म की परिभाषा में नहीं आता। इस फैसले से पूरे देश में जबरदस्त गुस्सा और नाराजगी फैल गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे अमानवीय करार दिया है। शांता कुमार ने कहा कि बलात्कार की शिकार नाबालिग लड़की के बारे में इस तरह के शब्द पढ़कर आत्मा भी कांप उठती है।

उन्होंने कहा कि अगर देश में 100 स्थानों पर अपराध होते हैं तो मुश्किल से एक अपराधी पकड़ा जाता है। यदि उच्च न्यायालय के जजों का यह स्तर है तो नीचे की न्यायपालिका का क्या हाल होगा। यह सोचकर देश का हर नागरिक चिंतित है। शांता कुमार ने देश में बढ़ते अपराधों और खासकर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अपराधियों को पकड़ने और सजा दिलवाने में बहुत कमी है। उन्होंने सरकार और नेताओं से इस समस्या पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों जजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। केवल तबादला पर्याप्त नहीं है। ऐसे जज किसी पंचायत के पंच बनने के भी योग्य नहीं हैं। इन दोनों के खिलाफ कठोर कदम उठाने चाहिए।