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कोलकाता, 01 जनवरी । तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने गुरुवार को प्रदेश में पाट उद्योग की मौजूदा स्थिति और भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह को पत्र लिखा है। दो पन्नों के इस पत्र में उन्होंने समस्याओं का जिक्र किया। साथ ही इसके समाधान को लेकर कुछ सुझाव भी लिखे हैं।

तृणमूल सांसद ने पत्र में लिखा कि केंद्र सरकार की ओर से पाट के बोरों के ऑर्डर लगातार कम होने से राज्य के पाट मिलों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसके चलते गंगा के दोनों किनारों पर स्थित हावड़ा, हुगली और बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्रों की कई पाट मिलों में काम बंद होने के नोटिस लगाए जा रहे हैं। कई मिलों में सप्ताह में काम के दिन घटाकर छह या पांच कर दिए गए हैं। हावड़ा की बाली जूट मिल समेत हुगली के कई कारखानों में काम के दिन कम कर दिए गए हैं। चांपदानी की नॉर्थब्रुक जूट मिल तो पूरी तरह बंद हो गई थी, जिसे स्थानीय विधायक अरिंदम गुंई के हस्तक्षेप के बाद आगामी सोमवार से दोबारा खोलने की तैयारी है। हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि वहां सप्ताह में कितने दिन काम होगा।

सूत्रों के मुताबिक, भद्रेश्वर की एंगस जूट मिल में भी कार्यदिवस घटाने को लेकर बैठक चल रही है।

तृणमूल नेताओं का आरोप है कि पाट उद्योग की यह हालत केंद्र सरकार की नीतियों का नतीजा है। ऑर्डर घटने से उत्पादन पर असर पड़ रहा है और जो बोरियां बन भी रही हैं, वे गोदामों में जमा की जा रही हैं लेकिन इसकी भी एक सीमा है। पार्टी को आशंका है कि हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में पाट मिलों के बंद होने की संख्या बढ़ सकती है, जिससे चुनाव से पहले कानून व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है।

बनर्जी ने अपने पत्र में इसे आर्थिक और सामाजिक आपात स्थिति करार दिया है। हालांकि इस पूरे मामले में राज्य सरकार के श्रम विभाग की भूमिका को लेकर तृणमूल के भीतर भी सवाल उठ रहे हैं।

बीते कई वर्षों से राज्य का पाट उद्योग संकट से जूझ रहा है। बड़ी संख्या में मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं और अधिकांश मिलों में अब ठेके पर मजदूरी की व्यवस्था चल रही है।

इस बीच पाट उद्योग को लेकर बैरकपुर के पूर्व सांसद अर्जुन सिंह का भी बयान सामने आया है। मिल इलाकों से जुड़े अर्जुन सिंह का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले एक महीने पहले इस संकट को लेकर दिल्ली और राज्य सरकार को पत्र लिखा था। उनका आरोप है कि मौजूदा संकट के लिए राज्य सरकार की भंडारण नीति जिम्मेदार है।