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कोलकाता, 28 फरवरी। सीबीआई जल्द ही कोलकाता की एक विशेष अदालत में आर. जी. कर त्रासदी से जुड़े मामले में पूरक आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही है। इस आरोप पत्र को नई दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय की एक विशेष कानूनी टीम की सीधी निगरानी में तैयार किया जा रहा है।
सीबीआई की कोशिश है कि 17 मार्च से पहले यह पूरक आरोप पत्र दाखिल कर दिया जाए, क्योंकि उसी दिन सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई तय है। पूरक आरोप पत्र में मुख्य रूप से साक्ष्यों से छेड़छाड़ के पहलू को उजागर किए जाने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) की रिपोर्ट, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और जब्त किए गए विभिन्न मोबाइल सिम कार्ड की जांच के निष्कर्ष इस आरोप पत्र के आधार बनेंगे। इसी कारण, सीबीआई के वकील ने टाला थाना के पूर्व थाना प्रभारी अभिजीत मंडल द्वारा अपने मोबाइल सिम कार्ड की वापसी के लिए दायर अर्जी का विरोध किया। सीबीआई ने अदालत में दलील दी कि यह सिम कार्ड मामले का अहम साक्ष्य है और जांच के इस चरण में इसे लौटाना संभव नहीं है।
इस सप्ताह पीड़िता के माता-पिता ने नई दिल्ली जाकर सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद से मुलाकात की और कोलकाता कार्यालय में जांच की धीमी गति को लेकर शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के पिता ने मीडिया को बताया, “सीबीआई निदेशक ने हमें करीब एक घंटे तक सुना और धैर्य रखने की सलाह दी। उन्होंने न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है और हमें उनकी बात पर भरोसा है। हमने अपने वकील करुणा नंदी से भी सर्वोच्च न्यायालय में अगली सुनवाई की रणनीति पर चर्चा की।”
करुणा नंदी इस मामले में वरिष्ठ चिकित्सकों के संगठन और जॉइंट प्लेटफॉर्म ऑफ डॉक्टर्स की भी वकील हैं।
कोलकाता की विशेष अदालत ने हाल ही में इस मामले के आरोपित संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इससे पहले, सीबीआई ने अभिजीत मंडल और आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व विवादित प्राचार्य संदीप घोष को साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालांकि, सीबीआई 90 दिनों के भीतर इनके खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल करने में विफल रही, जिसके कारण अदालत ने दोनों को जमानत दे दी थी।