कोलकाता, 29 मार्च । आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर के बलात्कार और हत्या मामले में सीबीआई अब इनक्वेस्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जख्मों के विवरण में अंतर पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि इन रिपोर्टों में पाए गए अंतर महज संयोग हैं या जानबूझकर जांच को गुमराह करने के लिए किए गए थे। इस जांच का मकसद यह पता लगाना है कि कहीं सबूतों से छेड़छाड़ या साक्ष्यों को बदलने की कोशिश तो नहीं हुई।

दरअसल, यह मुद्दा कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ में सुनवाई के दौरान भी उठा। उन्होंने इन दोनों रिपोर्टों में मौजूद अंतर को लेकर भी संज्ञान लिया।

सूत्रों के मुताबिक, पीड़िता के पेट और दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली पर कुछ जख्म थे, जिनका जिक्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नहीं किया गया। दिसंबर में केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता से जुड़ी मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था।

सीएफएसएल की रिपोर्ट के अनुसार, पोस्टमार्टम कक्ष में कई लोग मौजूद थे, जो मोबाइल से फोटो और वीडियो बना रहे थे। यह न केवल जांच प्रक्रिया के मानकों के खिलाफ था, बल्कि मृतका की गरिमा के लिए भी अनुचित था।

शुक्रवार को सीबीआई ने न्यायमूर्ति घोष की पीठ को स्पष्ट किया कि यह मामला ‘गैंगरेप’ का नहीं था, बल्कि केवल ‘बलात्कार’ और हत्या का मामला था। अदालत ने पहली सुनवाई के दौरान एजेंसी से इस बारे में स्पष्टता देने को कहा था। मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।