बालो में प्रार्थना सभा

खूंटी, 28 दिसंबर। मुरहू प्रखंड के बालो गांव में रविवार को सरना धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इससे पूर्व लुथड़ू मुंडा, विश्राम डोडराय एवं मंगरा बारजो की अगुवाई में सरना स्थल पर विधिवत पूजा-पाठ कर भगवान सिङबोंगा से क्षेत्र की खुशहाली और शांति की कामना की गई।

सभा को संबोधित करते हुए बुधराम सिंह मुंडा ने कहा कि सरना धर्म प्रकृति पर आधारित मानव सभ्यता का प्राचीनतम धर्म है, जो सभी धर्मों का आधार और संरक्षणकर्ता रहा है। सरना धर्म की अपनी विशिष्ट धार्मिक विधि-विधान, जीवन शैली, दर्शन और आदर्श हैं, जिनमें लाखों लोगों की गहरी आस्था है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण केंद्र और राज्य सरकारें सरना धर्म कोड तथा आदिवासी अधिकारों के प्रति उदासीन रवैया अपना रही हैं।

सरना धर्म कोड के अभाव में आदिवासियों की धार्मिक एवं सामाजिक एकता प्रभावित हुई है और धर्मांतरण जैसी पीड़ा वर्षों से झेलनी पड़ रही है। इसके कारण आदिवासियों की सामाजिक व्यवस्था कमजोर हो रही है और उनकी अस्मिता पर संकट गहराता जा रहा है। साथ ही सरना, जायर, देशाउली, समसान और जतरा जैसे पवित्र स्थलों का भी लगातार विनाश हो रहा है। उन्होंने सरकार से सरना धर्म के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरना धर्म कोड शीघ्र लागू करने की मांग की।

धर्मगुरु बगरय मुंडा ने कहा कि आज़ाद भारत में भी प्रकृति पूजक सरना धर्मावलंबियों के खिलाफ साजिश हो रही है। 2011 की जनगणना में 50 लाख से अधिक सरना धर्मावलंबियों के बावजूद उन्हें ‘अन्य’ श्रेणी में रखा गया, जबकि जैन धर्मावलंबियों को कोड दिया गया है। उन्होंने सरना कोड के लिए संगठित संघर्ष का आह्वान किया।

सभा में धर्मगुरु सोमा कंडीर, डॉ. सीताराम मुंडा, जयराम गुड़िया, सुमित गुड़िया, दुलारी गुड़िया, सुकरा तिर्की, जीतु पहान सहित खूंटी, बंदगांव, मुरहू, अड़की, तोरपा और रनिया क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।