
कोलकाता, 27 जनवरी ।कोलकाता के आनंदपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नाजीराबाद में हुए भीषण अग्निकांड की भयावहता ने अब दक्षिण बंगाल के गांवों को भी शोक में डुबो दिया है। इस त्रासदी की तपिश मोयना से लेकर पिंगला तक महसूस की जा रही है, जहां लापता युवकों के घरों में सन्नाटा और चीख-पुकार का माहौल है। रविवार रात डैकोरेटर्स और गोदाम में लगी आग में अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 30 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
घटनास्थल की स्थिति अत्यंत वीभत्स होने के कारण बरामद शवों की पहचान संभव नहीं हो पा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पहचान के लिए अब डीएनए जांच का सहारा लिया जाएगा। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई हिस्से पूरी तरह जलकर खाक हो गए।
इस अग्निकांड का सबसे गहरा असर पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर के उन परिवारों पर पड़ा है, जिनके युवा सदस्य रोज़गार की तलाश में कोलकाता गए थे। पश्चिम मेदिनीपुर के पिंगला ब्लॉक के मालीगेड़िया गांव के तीन युवक, कृष्णेंदु धारा, अनूप प्रधान और विश्वजीत साव, नाजीराबाद में फूलों के काम से जुड़े थे और अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है। घर पर कृष्णेंदु का नौ वर्षीय बेटा और अनूप की डेढ़ वर्षीय पुत्री अपने पिता की राह देख रहे हैं। शहीद मातंगिनी ब्लॉक के 26 वर्षीय राजू मन्ना की पत्नी और परिजन भी सदमे में हैं, रविवार रात परिवार वालों की उनसे अंतिम बार बातचीत हुई थी।
प्रशासनिक स्तर पर जांच की बात कही जा रही है, लेकिन लापता लोगों के परिजनों में व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश है। दमकल महानिदेशक रणबीर कुमार ने स्वीकार किया है कि संभवतः फायर ऑडिट के दौरान यह क्षेत्र छूट गया था। वहीं दमकल मंत्री सुजित बसु ने अग्निशमन उपकरणों की कमी पर दुख व्यक्त करते हुए मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
उधर, पूर्व मेदिनीपुर के जिलाधिकारी और संबंधित बीडीओ ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है। बावजूद इसके, मेदिनीपुर की गलियों में मातमी सन्नाटा पसरा है। परिजनों की पथराई आंखें किसी चमत्कार की आस में टीवी स्क्रीन और मोबाइल फोन पर टिकी हुई हैं।








