नई दिल्ली, 14 फरवरी भारत आगामी 16 से 20 फरवरी तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के भविष्य की दिशा तय करने वाले सबसे बड़े वैश्विक मंच की मेजबानी करने जा रहा है जिसमें 65 से अधिक देशों की सरकार के स्तर पर उपस्थिति रहेगी।
‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ अपनी तरह का पहला ऐसा वैश्विक सम्मेलन है, जो ग्लोबल साउथ के किसी देश में आयोजित किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस व्यक्तिगत रूप से इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनकी भागीदारी यह संकेत देती है कि वैश्विक स्तर पर एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को लेकर संयुक्त राष्ट्र भारत की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आयोजित इस समिट में अभूतपूर्व वैश्विक भागीदारी देखने को मिलेगी। 100 से अधिक देशों को आमंत्रित किया गया है जिसमें 65 से अधिक देशों के मंत्री और 20 राष्ट्रों के प्रमुख शिरकत करेंगे। लगभग 2 लाख प्रतिभागियों ने इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए पंजीकरण कराया है।
कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार शिखर सम्मेलन का मुख्य केंद्र कूटनीतिक और तकनीकी विमर्श रहेगा। 16 फरवरी को औपचारिक शुरुआत के बाद, 18 फरवरी का दिन सबसे अहम होगा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैदराबाद हाउस में विभिन्न देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इन बैठकों में सेमीकंडक्टर साझीदारी, साइबर सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी। 19 फरवरी को ‘लीडर्स राउंडटेबल’ के दौरान एक वैश्विक ‘एआई सेफ्टी रोडमैप’ और संयुक्त घोषणापत्र जारी होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करना है और इसके लिए सात चक्रीय रणनीति तैयार की गई है। भारत इस मंच के जरिए एआई को केवल एक तकनीक के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के औजार के रूप में पेश कर रहा है।
सम्मेलन के मुख्य एजेंडे में शामिल हैं:
* समावेशी विकास: स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि में एआई का प्रभावी उपयोग।
* एआई सेफ्टी: डीपफेक, फेक न्यूज़ और डेटा प्राइवेसी जैसी चुनौतियों का समाधान।
* डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर : भारत के सफल डिजिटल मॉडल को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना।
यह सम्मेलन भारत की ‘टेक्नोलॉजी कूटनीति’ का एक अनूठा मंच होगा। ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और फ्रांस के बाद यह चौथा वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयोजन के जरिए भारत विकसित और विकासशील देशों के बीच एक ‘सेतु’ के रूप में उभरेगा और वैश्विक एआई गवर्नेंस में अपनी अग्रणी भूमिका सुनिश्चित करेगा।
