
हावड़ा, 28 दिसंबर । हावड़ा सत्संग समिति की ओर से फोरशोर रोड स्थित लक्ष्मी विलास गार्डन में आयोजित रामचरितमानस के सामूहिक पाठ के छठवें दिन सिंहस्थल पीठाधीश्वर महंत क्षमाराम महाराज ने पाठ से पूर्व सार बताते हुए कहा कि भगवान की लीला में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
भगवान की लीला को श्रद्धा से देखना चाहिए।यह दिमाग की लीला नहीं है।मन,बुद्धि और चित्त से भरत ने जैसे त्राहि माम्-त्राहि-माम् कहकर भगवान को प्रणाम किया।इधर देवताओं की धड़कन बढ़ गई। तब उनके गुरु वृहस्पति ने कहा कि राम-भरत के मिलन से चिन्तित न हो। भरत राम-प्रेम के कारण आया है। भरत ने सीता के चरणों की धूल को स्पर्श कर प्रणाम किया।यह मर्यादा की बात है।
हमें जीवन में धर्म -संस्कारों के अनुसार जीना चाहिए।शादी-विवाह और स्वभाव में गलत मिश्रण मिल रहा है।यह दुखद स्थिति है।पशु-जाति में मर्यादा के उल्लघंन का परिणाम है जर्सी गाय।जर्सी गाय कभी गौ माता नहीं हो सकती ।
ऋषि-मुनियों ने मानव जाति के लिए जो व्यवस्था बनाई है उसका पालन करना हमारा दायित्व है।हर जाति-वर्ण के लोगों को भगवान के प्रति चलना चाहिए,किसी की मनाही नहीं है।आजकल लोगों को खुश करने के लिए प्रशंसा बढ़ा-चढ़ाकर करते हैं,जो कि गलत है।प्रशंसा उतना ही करो जितना तुम्हारे हृदय में बैठा है।चित्रकूट की सभा में सभी लोग भरत की प्रशंसा करते हैं क्योंकि भरत का मत साधुमत है।भगवान राम ने कहा जो भरत कहेगा वैसा मैं करूंगा।यह साधुमत है कि प्रभु के मत और स्वभाव के अनुकूल आपका मत हो।
भरत भगवान राम की चरण पादुका को आधार लेकर राजकाज करते हैं।अयोध्या की सम्पत्ति को प्रजाजन के कार्यों में खर्च करते हैं,उसके आसक्त नहीं होते।जीवन में जो कोई भी हो वह यदि प्रभु की इच्छा के अनुकूल कार्य करता है तो सदा आनंद में रहता है।भरत का त्याग और राम के प्रति प्रेम हम सभी के लिए प्रेरक है।
रामचरितमानस सामूहिक पाठ का आयोजन मनमोहन मल्ल एवं पवन पचेरिया के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया जा रहा है।इस अवसर पर पुरुषोत्तम पचेरिया,हरि भगवान तापडिया,सांवरमल अग्रवाल,बंशीधर शर्मा, भरतराम तिवाड़ी,की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।सूचना प्रसारण महावीर प्रसाद रावत ने किया।







