
-अनुराग ठाकुर की खरगे पर टिप्पणी के विरोध में विपक्ष ने राज्यसभा से वॉक आउट किया
नई दिल्ली, 3 अप्रैल । पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा लोकसभा में कल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बारे में की गई टिप्पणी को लेकर आज राज्यसभा में विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा किया और सदन से वॉक आउट किया।
आज सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभापति के समक्ष अनुराग ठाकुर के आरोपों पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मेरे 60 साल के संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन में इस तरह के झूठे और आधारहीन आरोप जो लोकसभा में अनुराग ठाकुर ने लगाए, वह अवमाननापूर्ण है। जब मेरे सहयोगियों ने उन्हें चुनौती दी, तो उन्हें अपनी अपमानजनक टिप्पणी वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन नुकसान तो हो चुका है, क्योंकि मीडिया और सोशल मीडिया ने उस बेबुनियाद आरोपों वाले बयान को प्रसारित कर दिया। खरगे ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता विपक्ष के नाते मैं अनुराग ठाकुर के आरोपों की निंदा करता हूं। अगर अनुराग ठाकुर आरोपों को साबित करने में विफल साबित होते हैं तो उन्हें संसद में बने रहने का अधिकार नहीं है। तब उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर वो अपने आरोपों को साबित कर देते हैं तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। मैं उससे जुड़े दस्तावेज यहां टेबल कर रहा हूं।
खरगे ने कहा कि एचडी देवेगौड़ा यहां सदन में बैठे हैं, वो अच्छी तरह जानते हैं, मुझे कभी कोई विधानसभा सदन में इस तरह नहीं बोला। अगर कभी कोई बोला तो सीएम ने बगल में आकर माफी मांगी। मैं कभी झूठ नहीं बोला और न ही कोई गलत काम किया। इस पर भाजपा के सदस्यों ने प्रतिवाद किया तो सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ओर से शोरशराबा और हंगामा शुरू हो गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू कुछ बोलने के लिए खड़े हुए लेकिन हंगामे के कारण वह अपनी बात पूरी नहीं कर सके। हंगामे के बीच खरगे ने सभापति से सरंक्षण की अपील की कि अनुराग ठाकुर के आरोपों को लेकर यहां जो कुछ हुआ, नेता सदन को उसके लिए माफी मांगनी चाहिए।
इस बीच सभापति ने सदन में शून्यकाल की कार्यवाही शुरू कर दी। इसके विरोध में कांग्रेस व उनके अन्य सहयोगी विपक्षी दलों के सदस्य सदन से वॉक आउट कर गये। इस मामले में सभापति ने कहा यदि हम इस मुद्दे की गंभीरता से जांच करें, तो यह कुछ स्थितियों पर निर्भर करता है। एक मुद्दा यह है कि एक संसद सदस्य सदन का सदस्य होने के महान विशेषाधिकार का उपयोग करता है, जो संवैधानिक संरक्षण है क्योंकि सदन में किसी सदस्य द्वारा कही गई किसी भी बात पर कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की जा सकती है और कोई आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती है। जब कोई सदस्य सदन में बोलता है, तो उसे छूट दी जाती है। मैंने कई मौकों पर यह कहा है कि हम दशकों और आधी सदी से अर्जित प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचा सकते।
इसी सप्ताह मैंने खरगे जी की तरह अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की थी, जब इस सदन के एक सदस्य ने टिप्पणी की थी, लेकिन उस पर ध्यान दिया गया। हालांकि सदस्य ने हटाए गए तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया। मैंने इस सदन को संकेत दिया था कि इस इलेक्ट्रॉनिक युग में, विस्फोटक सोशल मीडिया में, कही गई कोई भी बात माइक्रोसेकंड में ध्यान आकर्षित कर लेती है। इसलिए, अध्यक्ष द्वारा हटाए गए तथ्य शायद ही कोई उपाय हों। हमने खरगे की प्रतिष्ठा जैसी स्थितियों का सामना किया, और फिर राणा सांगा एक मुद्दा बन गए, लेकिन सदस्य ने अपना रुख अपनाया कि जब तक वे जीवित हैं, वे इसे दोहराते रहेंगे। मैंने तब एक बात कही थी- अगर इस संसदीय संस्था के सम्मान में कुछ हटाया जाता है, तो किसी भी सदस्य को इसका मुद्दा नहीं बनाना चाहिए, लेकिन सदस्य ने अपनी बात जारी रखी। वे बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं।