कोलकाता, 03 अप्रैल । दक्षिण 24 परगना जिले के पाथरप्रतिमा में स्थित एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हाल ही में हुए विस्फोट ने इस बात को उजागर किया है कि पश्चिम बंगाल में पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री को लेकर लागू कड़े दिशा-निर्देशों की किस तरह अनदेखी की जा रही है।

जांच में पता चला है कि इस मामले में आरोपित चंद्रकांत बनिक ने वर्ष 2023 में पटाखा निर्माण के लिए ‘ग्रीन लाइसेंस’ लेने की कोशिश की थी, लेकिन जिला प्रशासन ने उसे खारिज कर दिया था। इसका कारण यह था कि बनिक पहले भी अवैध पटाखों के कारोबार में संलिप्त होने के चलते गिरफ्तार हो चुका था। इसके बावजूद वह अपने आवास पर अवैध पटाखा फैक्ट्री चला रहा था, जिस पर जिला पुलिस की अनदेखी पर सवाल उठ रहे हैं।

चंद्रकांत बनिक और उसके छोटे भाई तुषार बनिक ने इस अवैध कारोबार को स्थानीय पंचायत से एक साधारण व्यापार लाइसेंस लेकर संचालित किया। हालांकि, यह लाइसेंस पटाखा निर्माण की अनुमति नहीं देता। इस घटना के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि राज्य में ऐसे कितने और अवैध पटाखा निर्माण केंद्र सक्रिय हैं, जो कागजों पर सख्त नियमों को दरकिनार कर संचालन कर रहे हैं।

‘पश्चिम बंगाल ग्रीन पटाखा निर्माण, भंडारण और बिक्री योजना’ के अनुसार, किसी भी व्यवसायिक बिक्री के लिए 15 किलोग्राम तक के पटाखों की खरीद की अनुमति जिला मजिस्ट्रेट से मिलती है। 15 से 500 किलोग्राम तक की खरीद के लिए विस्फोटक नियंत्रक कार्यालय से अनुमति जरूरी होती है, जबकि इससे अधिक मात्रा के लिए मुख्य विस्फोटक नियंत्रक कार्यालय से मंजूरी लेनी पड़ती है।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कागज पर नियम बेहद सख्त हैं ताकि विस्फोटक निर्माण सुरक्षित रहे, लेकिन राज्य में लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि इन नियमों का पालन कितना सही ढंग से किया जा रहा है।

दरअसल बीते कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल में अवैध पटाखा फैक्ट्रियों में विस्फोट के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है।

फरवरी 2025 : नदिया जिले के कल्याणी में एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।

2023 : पूर्व मेदिनीपुर के एगरा में एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से नौ लोगों की जान गई।

पिछले वर्षों में : दक्षिण 24 परगना के बजबज और उत्तर 24 परगना के दत्तपुकुर में भी इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई।