
कोलकाता, 02 अप्रैल । दक्षिण 24 परगना जिले के पाथरप्रतिमा में एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में सोमवार रात हुए भीषण विस्फोट में आठ लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद स्थानीय पंचायत की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर पंचायत ने इस अवैध कारोबार को कैसे चलने दिया।
जिला प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, इस अवैध पटाखा फैक्ट्री को बनिक परिवार के घर में चलाया जा रहा था। यह खुलासा हुआ है कि बनिक परिवार ने स्थानीय पंचायत से सिर्फ एक सामान्य व्यापार लाइसेंस प्राप्त किया था, जो पटाखा निर्माण के लिए वैध नहीं था। अब यह सवाल उठ रहे है कि स्थानीय पंचायत ने यह लाइसेंस कैसे जारी किया, खासकर तब जब इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपित चंद्रकांत बनिक का आपराधिक इतिहास पहले से ही पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चंद्रकांत बनिक को वर्ष 2022 में अवैध पटाखा व्यापार में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और तब उसके पास से लगभग 67 किलोग्राम अवैध पटाखे बरामद हुए थे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पंचायत ने पुलिस से कोई पृष्ठभूमि जांच कराए बिना ही यह व्यापार लाइसेंस जारी कर दिया?
स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह समझना मुश्किल है कि पुलिस को इस बात की जानकारी कैसे नहीं थी कि एक आवासीय परिसर में अवैध पटाखा फैक्ट्री चलाई जा रही थी। स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि उन्होंने कई बार पुलिस को इस अवैध कारोबार के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन पुलिस ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
इस मामले में चंद्रकांत बनिक का भाई तुषार बनिक, जो उस घर का सह-मालिक है जहां यह फैक्ट्री चल रही थी, अब भी फरार है। पुलिस ने दोनों भाइयों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 287 (आग या ज्वलनशील पदार्थ से लापरवाही), धारा 288 (विस्फोटक पदार्थों से लापरवाही), धारा 105 (हत्या के समान दोषी कृत्य), धारा 110 (हत्या के प्रयास), धारा 125 (मानव जीवन के लिए खतरा) और धारा 61 (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया है।
इसके अलावा, उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवा अधिनियम, 1950 की धारा 24 और 25 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है, जो बिना उचित लाइसेंस के पटाखा निर्माण व्यवसाय संचालित करने से संबंधित हैं।