पश्चिमी सिंहभूम, 25 मार्च । पश्चिमी सिंहभूम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की ओर से समाज में फैली कुप्रथाओं और अंधविश्वास के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और डायन प्रथा जैसी अमानवीय कुरीतियों को समाप्त करना है। कार्यक्रम की जानकारी प्राधिकार के सचिव रवि चौधरी ने दी।
सदर प्रखंड के विभिन्न गांवों में आयोजित इस कार्यक्रम को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष मो. शाकिर के निर्देश पर न्याय रथ के माध्यम से संचालित किया गया। शिविरों के जरिए ग्रामीणों को कानूनी जानकारी देते हुए बताया गया कि किसी व्यक्ति को डायन कहकर प्रताड़ित करना दंडनीय अपराध है।
अभियान के दौरान वक्ताओं ने कहा कि डायन प्रथा पूरी तरह अंधविश्वास पर आधारित है और आधुनिक समाज में इसका कोई स्थान नहीं है। लोगों से अपील की गई कि वे अफवाहों और भ्रांतियों से दूर रहें तथा किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न में शामिल न हों।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कई बार नशे की स्थिति में लोग इस तरह के झूठे आरोप लगा देते हैं, जिससे निर्दोष व्यक्तियों को मानसिक और शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। ऐसे मामलों में समाज को जागरूक और संवेदनशील रहने की आवश्यकता है।
डालसा की ओर से लोगों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं और किसी के भी अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की कुप्रथा का शिकार होता है, तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क कर नि:शुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।
इस अभियान को सफल बनाने में पीएलवी आशिमा चटर्जी, संगीता देवी, स्वाति मुखर्जी, हेमराज निषाद और रत्ना चक्रवर्ती ने सक्रिय भूमिका निभाई।
