रांची/चतरा, 24 फरवरी। झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र स्थित कसियातु जंगल में सोमवार शाम एक दर्दनाक एयर एंबुलेंस हादसे में मरीज, उनकी पत्नी, परिजन, डॉक्टर, पैरामेडिक और दो पायलट सहित कुल सात लोगों की मौत हो गई। रांची से दिल्ली जा रही रेडबर्ड एयरवेज प्रा. लि. की यह एयर एंबुलेंस उड़ान भरने के महज 23 मिनट बाद एटीसी रडार से गायब हो गई। खराब मौसम, तेज हवा और बारिश के बीच विमान के रूट से भटकने की आशंका जताई जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं, जबकि परिजनों ने भुगतान प्रक्रिया और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
देर रात तक राहत एवं बचाव अभियान चलाकर सभी शव बरामद कर लिए गए। इस हादसे से पूरे राज्य में शोक की लहर है।
रांची से दिल्ली जा रही रेडबर्ड एयरवेज की एयर एंबुलेंस ने सोमवार शाम 7:11 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। लगभग 7:34 बजे कोलकाता एटीसी से संपर्क टूट गया, जिसके बाद रात 8:05 बजे रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर को सक्रिय किया गया। खोजबीन के दौरान विमान का मलबा सिमरिया के घने जंगल में मिला। ग्रामीणों ने रात करीब 7:45 बजे तेज धमाके की आवाज सुनने की सूचना दी थी।
हादसे में दो पायलट—कैप्टन विवेक और कैप्टन सबराजदीप—के अलावा मरीज संजय कुमार, उनकी पत्नी अर्चना देवी, भगीना ध्रुव कुमार, डॉ. विकास कुमार गुप्ता और पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा की मौत हो गई। चतरा पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार अग्रवाल ने पुष्टि की कि सभी शव बरामद कर लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने चतरा सदर अस्पताल पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, चंपाई सोरेन, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और राजद नेता सत्यानंद भोक्ता सहित कई नेताओं ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जांच में ब्लैक बॉक्स, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) की गहन पड़ताल की जाएगी। मौसम की स्थिति, एटीसी से संवाद, विमान के मेंटेनेंस रिकॉर्ड और पायलटों के अनुभव की भी जांच होगी। डीजीसीए और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से जांच में जुटे हैं। दिल्ली से विशेषज्ञ टीम के पहुंचने की जानकारी दी गई है।
मृतक संजय कुमार चंदवा निवासी व्यवसायी थे। पलामू स्थित उनके लाइन होटल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में वे लगभग 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। उन्हें रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था। उनके दो पुत्र—17 वर्षीय शुभम और 13 वर्षीय शिवम—हैं।
परिजनों का आरोप है कि एयर एंबुलेंस सेवा के लिए कंपनी को 8 लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके थे, जबकि 2.50 लाख रुपये शेष थे। आरोप है कि पूर्ण भुगतान के बाद ही विमान ने उड़ान भरी।
प्रारंभिक जांच में खराब मौसम की आशंका
प्रारंभिक रिपोर्ट में खराब मौसम को हादसे की संभावित वजह बताया गया है। सोमवार शाम अचानक मौसम बिगड़ गया था। तेज हवा और झमाझम बारिश के बीच विमान अपने निर्धारित रूट से दाईं ओर डायवर्ट हो गया और संभवतः रास्ता भटक गया। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।
डॉ. विकास कुमार गुप्ता के पिता ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होतीं, तो मरीज को दिल्ली ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वहीं पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा के भाई ने भावुक होकर कहा कि पिता के निधन के बाद सचिन ही उनका एकमात्र सहारा थे।
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता और उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। फिलहाल हादसे की आधिकारिक जांच जारी है। पूरे राज्य में शोक का माहौल है और लोग इस दर्दनाक दुर्घटना के वास्तविक कारण सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।
