
कोलकाता, 29 अगस्त । कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट इलाके में शुक्रवार को ओबीसी अधिकार मंच की रैली में बड़ा बवाल हुआ है। पुलिस ने जैसे ही रैली रोकने की कोशिश की, वैसे ही भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ने पर पुरुलिया से भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो समेत कई नेता सड़क पर ही बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। पुलिस ने संयम बरतते हुए स्थिति को काबू में कर लिया और किसी बड़े टकराव को होने से टाल दिया।
सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर 12 बजे कॉलेज स्क्वॉयर से इस रैली का आह्वान किया गया था। हालांकि पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद भाजपा कार्यकर्ता और ओबीसी मंच के समर्थक सड़क पर उतर आए। पुलिस और सांसद महतो के बीच तीखी बहस भी हुई। पुलिस ने रास्ता खाली करने को कहा, लेकिन उल्टे महतो और उनके साथी वहीं बैठ गए।
गुरुवार को भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो और ओबीसी अधिकार मंच ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर आरोप लगाया था कि हिंदू ओबीसी समुदाय को योजनाओं और अवसरों से लगातार वंचित किया जा रहा है। इसी आरोप को आधार बनाकर शुक्रवार को विधानसभा अभियान की घोषणा की गई थी। हालांकि महतो ने दावा किया कि इस अभियान के पीछे भाजपा की आधिकारिक भूमिका नहीं है, बल्कि यह ओबीसी समुदाय का स्वतंत्र आंदोलन है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को लेकर भाजपा पर पलटवार किया। गुरुवार को तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने विपक्ष को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट में जाकर ओबीसी आरक्षण को लेकर स्थगन आदेश हटवाया। जिस दिन आदेश मिला, उसी घंटे से सरकार ने प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी। विपक्ष सिर्फ राजनीति करता है और छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाता है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ज्वाइंट एंट्रेंस का रिजल्ट निकालने में देरी हुई, इसके लिए हम खेद प्रकट करते हैं। लेकिन इसमें सरकार की गलती नहीं है। जो लोग कोर्ट में केस करके भर्ती प्रक्रिया रोकते हैं, वे असल में राजनीति में नाकाम हैं और बैकडोर से छात्रों का भविष्य रोकते हैं।