
नई दिल्ली, 3 अप्रैल । राज्यसभा में गुरुवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक-2025 पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सदस्य डा. सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि आज भाजपा के नेता 1995 और 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार में लाए वक्फ संशोधन पर सवाल उठा रहे हैं। यह अनुचित है, क्योंकि उस समय भाजपा ने भी उसका समर्थन किया था और वो बिल पास हुआ था।
सदन में विपक्ष की तरफ से चर्चा की शुरुआत करते हुए डा. हुसैन ने कहा कि 1995 में बण्डारू दत्तात्रेय ने लोकसभा में और सिकंदर बख्त ने राज्यसभा में इस बिल से जुड़ी अपनी बातें रखी थीं। इस दौरान इन दोनों नेताओं ने बिल का समर्थन किया था। जब हम 2013 में संशोधन लेकर आए थे, उस वक्त भाजपा की तरफ से लोकसभा में शाहनवाज हुसैन और राज्यसभा में मुख्तार अब्बास नकवी ने अपनी बात रखी थी और इस संशोधन का समर्थन किया था। अगर ये संविधान के खिलाफ था, तो आपने इसका समर्थन क्यों किया?
डा. हुसैन ने दावा किया कि ये वक्फ बिल पूरी तरह से गलत जानकारी कैंम्पेन पर आधारित है। किरेन रिजिजू कह रहे हैं कि वो पारदर्शिता लाएंगे, वक्फ बोर्ड को शक्ति देंगे, इसे मजबूत बनाएंगे। आप 10 साल से सरकार में हैं- आज तक ऐसा क्यों नहीं किया? अगर वक्फ बोर्ड से जुड़ी वेबसाइट देखेंगे तो आपको वहां सिर्फ किरेन रिजिजू का नाम नजर आएगा। वहां कोई काउंसिल नहीं है। भाजपा शासित राज्यों में तो स्टेट वक्फ बोर्ड तक नहीं बनाए गए हैं। आज भाजपा कह रही है कि वो जेपीसी की रिकमेंडेशन लाई है, लेकिन सच्चाई ये है कि वहां क्लॉज के हिसाब से चर्चा ही नहीं की गई। सदन के इतिहास में पहली बार जेपीसी पर क्लॉज के हिसाब से चर्चा नहीं हुई। जेपीसी में हमारा कोई सुझाव नहीं माना गया।
उन्होंने कहा कि वक्फ का मतलब दान है। दान कोई भी किसी को भी कर सकता है। दान का ये कॉन्सेप्ट हर मजहब में है। दान के इस कॉन्सेप्ट को मैनेज और रेगुलेट करने के लिए वक्फ बोर्ड बनाए गए हैं। वर्ष 1995 और 2013 के एक्ट में वक्फ बोर्ड को मजबूत करने के लिए, वक्फ की संपत्ति को बचाने के लिए, अतिक्रमण करने वालों को हटाने के लिए, उसमें पारदर्शिता लाने के लिए हम संशोधन लेकर आए थे। और उस समय हमें इनका (भाजपा) पूरा समर्थन मिला था। सरकार बार-बार कह रही है कि वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को अपनी जमीन घोषित कर सकता है। ये वक्फ बोर्ड के खिलाफ सबसे बड़ा आरोप है और सबसे बड़ा झूठ है। शायद किरेन रिजिजू को ये बात पता नहीं कि हर राज्य में जांच कराने के लिए अलग-अलग नियम हैं।
डा. हुसैन ने कहा, मैं कर्नाटक में पिछले 6 साल से वक्फ बोर्ड का सदस्य हूं, सातवां साल चल रहा है। वहां पर पूरी जांच होने के बाद, सर्वे कमिश्नर उसको सर्वे करता है। कलेक्टर उसको चेक करता है। फिर राज्य सरकार के पास जाता है। राज्य सरकार उसको वेरिफाई करती है। उसके बाद उसका गजट नोटिफिकेशन जारी करती है। अगर उसके बावजूद भी कोई संतुष्ट नहीं है तो वो ट्रिब्यूनल में जा सकता है। अगर वहां भी उसके खिलाफ फैसला आता है तो वो कोर्ट जा सकता है। सरकार आज कह रही है कि कोर्ट में ट्रिब्यूनल के फैसले को रिव्यू नहीं कर सकते। कोर्ट में बिलकुल रिव्यू कर सकते हैं। रिजिजू ने ट्रिब्यूनल के बारे में कहा कि पहले वो दो थे और उनकी सरकार ने बढ़ाकर तीन कर दिए जबकि 2013 में भी तीन ही ट्रिब्यूनल थे।
उन्होंने कहा कि सरकार एक नया प्रोविजन लाई है कि सिर्फ मुस्लिम ही वक्फ बोर्ड को दान कर सकते हैं। दूसरा नियम जोड़ा है कि वक्फ को दान करने से पहले पांच साल तक इस्लाम प्रैक्टिस करना होगा। वहीं, जेपीसी में जाने के बाद कह रहे हैं कि “डिमोंस्ट्रेट” करना होगा। पहले प्रधानमंत्री मोदी कहते थे कि हम कपड़ों से पहचान लेते हैं। आप कैसे पहचानेंगे, हम कैसे “डिमोंस्ट्रेट” करेंगे। कौन से कपड़े पहनने पड़ेंगे। मैं टोपी पहनकर जाऊं या दाढ़ी लगाकर जाऊं या फिर कोई मेरे घर में सीसीटीवी कैमरा लगाकर देखेगा कि मैं नमाज पढ़ रहा हूं या नहीं पढ़ रहा हूं। मस्जिदों में भी सीसीटीवी लगाकर देखेंगे? या फिर कोई और तरीका है ये जानने का कि कोई व्यक्ति पांच साल से इस्लाम धर्म मान रहा है या नहीं। इस बिल में सरकार सबसे बड़ा जो प्रावधान ला रही है वो है, “वक्फ बाई यूजर”। सरकार क्यों इस प्रावधान को ला रही है, सबको पता है। उसकी पूरी निगाह संपत्ति पर है, जमीन पर है।