
नई दिल्ली, 23 जनवरी । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों दलों ने आजादी के आंदोलन में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के योगदान को नजरअंदाज करने के प्रयास किए।
भाजपा मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि `आज 23 जनवरी भारत की प्रथम निर्वासित सरकार के प्रमुख नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है, जिसे हम सब पराक्रम दिवस के रूप में मनाते हैं। नेताजी ने 1943 में भारत की पहली निर्वासित सरकार बनाई और किसी वायसराय या गवर्नर जनरल से शपथ नहीं ली थी।
जैसे जवाहरलाल नेहरू जी ने 2 सितंबर 1946 को वेवल के द्वारा और 15 अगस्त, 1947 को माउंटबेटन के द्वारा शपथ ली थी।
अतः पूर्ण स्वतंत्र विचारों से स्वतंत्र भारत की पहली स्वतंत्र सरकार स्थापित करने के प्रथम प्रतीक सुभाष चंद्र बोस जी के स्मरण का यह पर्व है। भारत की स्वतंत्रता में अनेक लोगों ने अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं।
परंतु नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान सर्वाधिक अग्रणी और सर्वाधिक अविस्मरणीय है।
परंतु उसे विस्मृत करने के अनेक कुत्सित प्रयास भारत के इतिहास में हुए हैं।’
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि `बाबा साहेब अंबेडकर ने 1955 में बीबीसी को दिए अपने इंटरव्यू में कहा कि भारत को जो आजादी मिली, वो इसलिए मिली क्योंकि भारतीय सेना के सैनिकों की वफादारी अंग्रेजों के प्रति नहीं रह गई थी।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय सैनिकों की अंग्रेज सरकार के प्रति वफादारी कभी नहीं बदलेगी, ये वो सोचते थे।
लेकिन, सुभाष चंद्र बोस की वजह से अंग्रेजों का यह सपना पूरी तरह से चकनाचूर हो गया।
1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कहा था कि यही मौका है, हमें ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।
लेकिन, कांग्रेस ने ये दबाव क्यों नहीं बनाया, 3 साल तक क्यों इंतजार किया?’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी में 14 जुलाई, 1942 में पारित रिजोल्यूशन में कहा गया कि “ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध जो नकारात्मक भाव है, उसे सहयोग और सकारात्मक में बदलेंगे और हम एवं ब्रिटेन मिलकर दुनिया के लोगों और भारत के लोगों के लिए सकारात्मक वातावरण बनाएंगे, आपकी फौजें यहां रहें, इसके लिए कांग्रेस पूरी स्वेच्छा से समर्थन के लिए तैयार है।”
ये मूल कारण था कि आपने (कांग्रेस) 1931 से लेकर 1947 तक 1942 को छोड़कर कोई भी आंदोलन नहीं किया।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की धरती के सबसे बड़े गौरव में से एक माने जाने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति जो सम्मान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पेश किया, 2018 में जब आजाद हिंद की निर्वासित सरकार के 75 वर्ष पूर्ण हुए थे, उस समय हमारे जो सेनानी जीवित थे, उन सबको पूर्ण गौरव और सम्मान के साथ गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल किया और उनका सम्मान किया।
किसी राजनीतिक दल ने प्रधानमंत्री मोदी से पूर्व इस तरह का सम्मान नेताजी के नहीं किया।
इंडिया गेट पर जहां 1968 तक जॉर्ज 5वें की मूर्ति रही, वहां नेताजी की मूर्ति को पुनर्स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी भी कांग्रेस के गोत्र की है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से सवाल करते हुए कहा कि इतने दिन तक क्यों याद नहीं आया कि नेताजी को वो सम्मान और वो स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति तृणमूल के मन में लेशमात्र भी सम्मान है, तो उन्हें अपने नाम में से कांग्रेस हटा देना चाहिए।
अन्यथा बंगाल की प्रबुद्ध जनता उनको तृणमूल अर्थात जड़-मूल से खत्म कर देगी।








