
चतरा, 31 अगस्त। झारखंड भुईंया समाज संघर्ष समिति के बैनर तले रविवार को पत्थलगड़ा फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित झकझोर झूमर कार्यक्रम में पारंपरिक लोकधुनों और नृत्यों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। चतरा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी हजारों की संख्या में लोग इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे।
कार्यक्रम की शुरुआत तुलसी बीर और करम डाल की पूजा-अर्चना से हुई। जैसे ही मांदर और नगाड़ों की थाप गूंजी, पूरा मैदान लोकसंस्कृति के उल्लास से भर उठा। कलाकारों ने रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में मंच पर प्रवेश किया और समूह में झूमर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। महिलाओं और युवतियों की कतारें, हाथों में रूमाल लहराते हुए, गीत-संगीत की लय पर झूमती रहीं।
दिनभर कार्यक्रम स्थल मेले जैसा माहौल बना रहा। चारों ओर दुकानों की कतारें, लोक-भोज की खुशबू और ढोल-नगाड़ों की गूंज ने पूरे आयोजन को उत्सव जैसा बना दिया। देर शाम तक कलाकारों के एक से बढ़कर एक प्रस्तुति पर लोग झूमते रहे।
इस अवसर पर समाज के संरक्षक दिनेश्वर भुईंया ने कहा, “भुईंया समाज का इतिहास आदिकाल से जुड़ा है। हमारी सभ्यता और संस्कृति प्रकृति-आधारित है। झूमर केवल नृत्य नहीं, बल्कि हमारी पहचान है।”
प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन नायक ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज अपनी प्राचीन विरासत को जीवित रख रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज की समस्याओं और पिछड़ेपन की ओर भी सरकार व जनमानस का ध्यान आकर्षित होता है।
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने माना कि झूमर जैसी लोकपरंपराएँ ही समाज को उसकी जड़ों से जोड़े रखती हैं। युवा पीढ़ी भी इन आयोजनों के माध्यम से अपनी संस्कृति से परिचित हो रही है।