कोलकाता, 26 मार्च । पश्चिम बंगाल में स्कूल भर्ती घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने आरोपितों के हस्तलिपि नमूने लिए हैं। जांच एजेंसी ने इन नमूनों को जब्त की गई डायरियों में दर्ज लेन-देन की जानकारी से मिलान करने के लिए लिया है, जिससे घोटाले में आरोपितों की संलिप्तता की पुष्टि की जा सके।

सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने इस मामले में कथित दलाल अरुण हाजरा और उसके छह एजेंटों के हस्तलिपि नमूने लिए हैं। इन नमूनों की तुलना उन डायरियों में दर्ज लिखावट से की जाएगी, जो जांच एजेंसी को बरामद हुई हैं। इन डायरियों में भर्ती घोटाले से जुड़े पैसों के लेन-देन का पूरा ब्योरा होने का दावा किया जा रहा है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल आरोपपत्र में अरुण हाजरा का नाम पहले से ही शामिल है। ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है और उसने हाजरा को सरकारी स्कूलों में अवैध नियुक्तियों में शामिल मुख्य बिचौलिया माना है।

सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले में बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन हुआ है। बरामद डायरियों में दर्ज जानकारी के अनुसार, अरुण हाजरा ने घोटाले के एक अन्य मुख्य आरोपित सुजय कृष्ण भद्र को लगभग 39 करोड़ रुपये सौंपे थे। यह रकम सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षकीय पदों पर नौकरी दिलाने के लिए अभ्यर्थियों से वसूली गई थी।

प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए 12 करोड़ रुपये

ग्रुप-डी गैर-शिक्षकीय पदों के लिए 15 करोड़ रुपये

ग्रुप-सी गैर-शिक्षकीय पदों के लिए नौ करोड़ रुपये

अन्य स्कूल पदों के लिए तीन करोड़ रुपये

सीबीआई ने आरोपितों के हस्तलिपि नमूनों के अलावा, अरुण हाजरा और सुजय कृष्ण भद्र के आवाज़ के नमूने भी लिए हैं। इनकी जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि क्या ये आरोपित घोटाले से जुड़े टेलीफोन पर हुई बातचीत में शामिल थे।

इस मामले में कई आरोपितों के खिलाफ अदालत में सुनवाई चल रही है। हाल ही में अदालत ने कल्याणमय भट्टाचार्य, जो कि पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी के दामाद हैं, का बयान दर्ज किया। इसके बाद अदालत ने भट्टाचार्य को आरोपित बनाए जाने से छूट दे दी।

पार्थ चटर्जी अभी भी जेल में बंद हैं। हालांकि, ईडी के मामले में उन्हें जमानत मिल गई थी, लेकिन सीबीआई द्वारा दर्ज आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के मामले के कारण वह अब भी हिरासत में हैं।

स्कूल भर्ती घोटाले का मुकदमा कोलकाता की धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत में चल रहा है। सीबीआई और ईडी लगातार नए सबूत जुटा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।