कोलकाता, 03 अप्रैल । पश्चिम बंगाल में शिक्षकों की 25 हजार 753 नियुक्तियां रद्द होने के बाद माकपा ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह  रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरे, ताकि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) द्वारा की गई नियुक्तियों को गंभीर अनियमितताओं से ग्रस्त और भ्रष्ट करार देते हुए रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नौकरियां चली गईं, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों की नौकरियां जाने से राज्य के स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी। उन्होंने राज्य सरकार से शीघ्रता से रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की, ताकि छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल 2024 के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें इन नियुक्तियों को रद्द करते हुए राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर नई भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया था।

माकपा नेता मोहम्मद सलीम ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार की अवैध भर्ती प्रक्रिया ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बदनाम कर दिया है।

उन्होंने दावा किया कि करीब एक लाख लोग इस फैसले से प्रभावित हुए हैं, क्योंकि 26 हजार से अधिक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नौकरियां चली गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां किसकी गलती से गईं, यह पता लगाया जाना चाहिए।

माकपा नेता ने कहा कि पार्टी ने कभी यह नहीं कहा कि सभी नियुक्तियां अवैध थीं, लेकिन कुछ लोगों की भ्रष्टाचारपूर्ण गतिविधियों के कारण सभी प्रभावित हुए हैं।

सलीम ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों के निहित स्वार्थों के कारण दस्तावेज़ों को जानबूझकर नष्ट कर दिया गया, जिससे वैध और अवैध रूप से नियुक्त लोगों के बीच कोई स्पष्ट अंतर नहीं किया जा सका।