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पुलिस सूत्रों के अनुसार, बरामद पासपोर्टों में नदिया जिले के निवासियों के नाम के साथ-साथ बिहार और ओडिशा के लोगों के नाम से बने पासपोर्ट भी शामिल हैं। ये पासपोर्ट असली हैं या फर्जी, इसकी जांच की जा रही है।

बताया गया है कि प्रीतम पहले रोजगार के सिलसिले में मुंबई में रहता था। दोनों ही आरोपितों ने खासमल्ली इलाके में एक मकान किराए पर लिया था।

प्राथमिक जांच में पुलिस को पता चला है कि आरोपित विदेश में नौकरी दिलाने का लालच देकर लोगों से पासपोर्ट जमा कराते थे। इसके बाद न तो नौकरी दिलाई जाती थी और न ही पासपोर्ट लौटाए जाते थे। पासपोर्ट वापस करने के नाम पर भी पीड़ितों से रुपये की मांग की जाती थी। इस संबंध में पुलिस के पास पहले से शिकायतें भी दर्ज थीं।

पुलिस के मुताबिक, पिछले सात-आठ महीनों से आरोपित उक्त किराए के मकान में रह रहे थे। गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस ने छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।