पलामू में भाजपा का आंदोलन 10 अप्रैल को

पलामू, 09 अप्रैल। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में मगही और भोजपुरी भाषाओं को क्षेत्रीय व स्थानीय भाषा के रूप में शामिल नहीं किए जाने पर पलामू जिले में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मुद्दे पर झारखंड सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आंदोलन की घोषणा की है।

भाजपा ने 10 अप्रैल (शुक्रवार) को डालटनगंज के छहमुहान पर मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी जाएगी कि वह अपने “भेदभावपूर्ण” निर्णय को वापस ले, अन्यथा पूरे जिले में व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।

पलामू सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया, पांकी विधायक शशिभूषण मेहता और भाजपा जिलाध्यक्ष अमित तिवारी ने संयुक्त रूप से यह जानकारी दी। नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार मगही और भोजपुरी जैसी स्थानीय भाषाओं की उपेक्षा कर रही है।

विधायक आलोक चौरसिया ने कहा कि मगही और भोजपुरी केवल भाषाएं नहीं, बल्कि क्षेत्र की संस्कृति और पहचान की आत्मा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन भाषाओं को नजरअंदाज करना उन्हें धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में उठाया गया कदम है, जो बेहद चिंताजनक है।

पांकी विधायक शशिभूषण मेहता ने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भाषा के आधार पर किसी भी छात्र के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है, बावजूद इसके सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

जिलाध्यक्ष अमित तिवारी ने बताया कि प्रस्ताव सामने आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने पलामू समाहरणालय के समक्ष उसकी प्रति जलाकर विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने इसे पलामू के लोगों के लिए “आत्मघाती निर्णय” बताया।

भाजयुमो जिलाध्यक्ष विपुल गुप्ता ने सवाल उठाया कि जब सरकार उड़िया और बंगला जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा दे सकती है, तो मगही और भोजपुरी को क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सरकार के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

इस मौके पर भाजपा के वरिष्ठ नेता श्यामनारायण दुबे, शिव मिश्रा सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।