आयकर आयुक्त

पूर्वी सिंहभूम, 20 मार्च । सिंहभूम चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के तत्वावधान में शुक्रवार को बिष्टुपुर स्थित चेंबर भवन में एक संवादात्मक सत्र (इंटरैक्टिव सेशन) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिहार-झारखंड के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त जयंत मिश्रा ने क्षेत्रीय विकास, कर व्यवस्था और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

अपने संबोधन में जयंत मिश्रा ने कहा कि जमशेदपुर सहित झारखंड के कई हिस्सों में हवाई संपर्क की कमी क्षेत्रीय विकास में बड़ी बाधा बन रही है। इसका सीधा असर न केवल निवेश पर पड़ता है, बल्कि राजस्व वृद्धि भी प्रभावित होती है। उन्होंने करदाताओं से समय पर कर भुगतान करने की अपील करते हुए कर आधार बढ़ाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में आयकर विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान व्यापारियों, उद्यमियों और कर पेशेवरों ने आयकर से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों, जैसे कर अनुपालन, प्रक्रियात्मक जटिलताएं और व्यवहारिक समस्याएं पर अपने अनुभव साझा किए। विभागीय अधिकारियों ने इन समस्याओं के समाधान भी प्रस्तुत किए।

सत्र का संचालन उपाध्यक्ष एवं कर अधिवक्ता राजीव अग्रवाल ने किया। उन्होंने मुख्य अतिथि का परिचय देते हुए कहा कि इस तरह के संवाद कार्यक्रम करदाताओं और कर प्रशासन के बीच विश्वास को मजबूत करने में सहायक होते हैं।

जयंत मिश्रा ने नया आयकर अधिनियम 2025 का उल्लेख करते हुए बताया कि यह 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और इसे अधिक सरल व स्पष्ट बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि पुराने अधिनियम के तहत लंबित मामलों का निपटारा उसी के अनुसार किया जाएगा, जिससे पेशेवरों को कुछ समय तक दोनों कानूनों के साथ काम करना होगा।

उन्होंने जानकारी दी कि देश में लगभग 75 करोड़ पैन धारक हैं, लेकिन केवल 9 करोड़ लोग ही आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं। झारखंड में यह प्रतिशत और भी कम है, जिसे बढ़ाने के लिए जागरूकता जरूरी है।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि आयकर विभाग अप्रैल माह से नए अधिनियम को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान शुरू करेगा, जिसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, अधिवक्ता, उद्यमी और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

चेंबर के सचिव अंशुल रिंगसिया ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम पारदर्शिता को बढ़ावा देने और कारोबार को सुगम बनाने में सहायक होते हैं। वहीं निवर्तमान अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने सुझाव दिया कि नए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग कुछ अधिकारियों को विशेष रूप से नामित करे, जो नियमित मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।-