
रांची, 04 जनवरी। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने पेसा नियमावली को लेकर झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में पेसा अधिनियम को उसकी मूल भावना से छेड़छाड़ कर लागू किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा आदिवासी समाज के साथ किए गए इस अन्याय और कथित हेरा-फेरी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी।
बाबूलाल मरांडी ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि, “चोर चोरी से जाए, हेरा-फेरी से न जाए”—यह कहावत झारखंड में पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन पर पूरी तरह सटीक बैठती है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार ने पेसा कानून को इस तरह लागू किया है, जिससे इसके खनन माफिया मित्रों और धर्मांतरण गिरोहों को लाभ पहुंचाने की मंशा स्पष्ट झलकती है। अधिकार देने के नाम पर आदिवासी समाज के साथ छल किया गया है।
मरांडी ने कहा कि आदिवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना झामुमो, कांग्रेस और राजद की पुरानी प्रवृत्ति रही है। झामुमो ने पहले कांग्रेस के साथ मिलकर झारखंड आंदोलन की मूल आत्मा से समझौता किया और अब पेसा कानून में अव्यावहारिक प्रावधान जोड़कर एक बार फिर आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिबू सोरेन से लेकर हेमंत सोरेन तक, सत्ता और राजनीतिक स्वार्थ के लिए आदिवासी हितों की लगातार अनदेखी की गई है।
पेसा नियमावली के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उपायुक्त के नेतृत्व में टीम बनाकर ग्राम सभाओं की स्वायत्तता और उनके अधिकारों में हस्तक्षेप करने का प्रयास साफ दिखाई देता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब पूरा जिला अधिसूचित क्षेत्र में आता है, तो फिर केवल 5 हेक्टेयर या उससे कम क्षेत्र वाले ग्रेड-1 बालू घाटों तक ही ग्राम सभा के अधिकार क्यों सीमित किए गए हैं। इसी तरह ग्रेड-2 बालू घाटों के संचालन में ग्राम सभा को केवल अनुमति तक सीमित रखना और उन्हें पूर्ण अधिकार न देना भी समझ से परे है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वर्तमान स्वरूप में लागू की गई पेसा नियमावली 1996 के मूल पेसा कानून की भावना के विपरीत है और इसे सरकार ने अपने राजनीतिक व अन्य स्वार्थों की पूर्ति के लिए तैयार किया है। उन्होंने दोहराया कि भारतीय जनता पार्टी आदिवासी समाज के अधिकारों और सम्मान के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी और इस अन्याय को स्वीकार नहीं करेगी।








