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पणजी, 21 नवंबर  भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भाग ले रहे लगभग 130 युवा लघु फिल्म निर्माताओं को रचनात्मक और उद्देश्यपूर्ण सिनेमा के भविष्य की आशा मान कर प्रेरित और प्रोत्साहित किया जा रहा है।

फिल्म महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत पणजी की कला अकादमी में सीएमओटी यानी क्रिएटिव माइन्ड्स आफ टुमाॅरो, सत्र में केन्द्रीय राज्य मंत्री सूचना प्रसारण एवं संसदीय कार्य एल मुरुगन, सूचना प्रसारण सचिव संजय जाजू, राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम के प्रबंध निदेशक और शॉर्ट्स टीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्टर पिल्चर मौजूद थे। देशभर से आए शार्ट फिल्म बनाने वाले 130 युवाओं की पांच टीमें मौजूद थीं।

सत्र का उद्घाटन करते हुए श्री मुरुगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न के अनुरूप जब युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की पहल शुरू हुई तो बहुत कम लोग आगे आए थे। आज युवाओं की एक हजार से ज्यादा प्रविष्टियां आयीं हैं और 125 रचनाओं को चुना गया है। उन्होंने कहा कि ये नये रचनाकार भारत के भविष्य के सिनेमा की बुनियाद बनेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 में विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। ये युवा फिल्मकार भारत को सिने जगत में अग्रणी बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत इतिहास से ही कथाओं कहानियों का देश रहा है। यहां लाखों कहानियां बिखरीं पड़ीं हैं। अभी तक कुछ सौ कहानियां ही कही गईं हैं। अनकही कहानियां ये युवा फिल्मकार कहें तो भारतीय सिनेमा कहां से कहां पहुंच जाएगा।

शॉर्ट्स टीवी के सीईओ कार्टर पिल्चर ने कहा कि लोगों के बीच ये लघु फिल्में जिस कदर लोकप्रिय हो रही हैं, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि शॉर्ट्स ही भविष्य का सिनेमा है। ऐसे में युवा फिल्मकार बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उन्होंने युवा फिल्मकारों की पांच टीमों को 48 घंटे में एक फिल्म बनाने का चैलेंज दिया जिसमें विजेता को पुरस्कृत किया जाएगा।

बाद में मंत्री ने क्रिएटिव माइंड्स ऑफ टुमॉरो के साथ एक सामूहिक तस्वीर भी खिंचवाई।

इसके बाद शुरुआत एक मास्टर क्लास के साथ हुई जिसे उनकी कल्पना शक्ति और रचनात्मक प्रवृत्ति को तेज करने के लिए डिज़ाइन किया गया था जिसमें उन्हें आगामी 48-घंटे की फिल्म चैलेंज के लिए तैयार किया गया। बाद में, टीमें अपने रेकी के लिए रवाना हुईं। उन्होंने स्थानों का पता लगाया, अपनी संभावनाओं को तैयार किया और उन कहानियों को आकार देना शुरू कर दिया जिसे उलटी गिनती शुरू होने के बाद जीवंत करने को तत्पर थे। इन युवा शक्ति को योजना बनाते, चर्चा करते और सपने देखते हुए किसी विशेष रचनात्मकता और उत्कृष्टता की शुरुआत का आभास हुआ।