प्रतापराव जाधव ने ब्रिक्स सीसीआई हेल्थ केयर समिट 2025 की अध्यक्षता की

नई दिल्ली, 29 अगस्त। आयुष मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री प्रातपाराव जाधव ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने एकव्यापक आयुष पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है, जिसमें शोध, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, औषधि उत्पादन और मजबूत नियामक तंत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है, जो भारत को वैश्विक स्वास्थ्य एवं वेलनेस लीडर के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। आज भारत में 1,000 से अधिक आयुष कॉलेज हैं, जिनमें 500 से ज्यादा आयुर्वेद संस्थान शामिल हैं, जिन्हें व्यापक शोध नेटवर्क का सहयोग प्राप्त है।

शुक्रवार को नई दिल्ली में “ब्रिजिंग ट्रेडिशन एंड इनोवेशन” विषय पर आयोजित ब्रिक्स सीसीआई हेल्थकेयर समिट 2025 की अध्यक्षता करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि ब्रिक्स, जो दुनिया की लगभग आधी आबादी, वैश्विक जीडीपी का एक-तिहाई और विश्व व्यापार का पांचवां हिस्सा है, उसे समावेशी और सतत विकास को गति देने के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।

मंत्री ने आयुष पद्धतियों की वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्राज़ील में आयुर्वेदिक चिकित्सकों के समुदाय से लेकर रूस की स्वास्थ्य सेवाओं में आयुर्वेद के समावेश और चीन में पारंपरिक चिकित्सा की समानांतर प्रगति तक, दुनिया भर में आयुर्वेद का प्रभाव बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि यद्यपि आयुर्वेद और योग का वैश्विक बाज़ार तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह विकास समावेशी, नैतिक और सतत हो। इसके लिए सार्वजनिक–निजी भागीदारी, डिजिटल हेल्थ इनोवेशन, न्यूट्रास्युटिकल अनुसंधान और उद्यमियों, नवोन्मेषकों तथा किसानों की पहचान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

जाधव ने ज़ोर दिया कि आयुष उत्पादों के लिए ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत सहयोग और समन्वित ढांचे से बाज़ार का विस्तार होगा, आर्थिक संवेदनशीलता घटेगी और भारत को वैश्विक स्वास्थ्य एवं वेलनेस लीडर के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

मंत्री ने आगे जानकारी दी कि आयुष मंत्रालय ने 25 देशों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे पारंपरिक चिकित्सा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मज़बूत नींव तैयार हुई है। उन्होंने ब्रिक्स देशों से आह्वान किया कि इस समिट का उपयोग नए गठबंधनों के निर्माण और ऐसे स्वास्थ्य मॉडल विकसित करने में करें, जो परंपरा और नवाचार का संतुलन प्रस्तुत करें।