कोलकाता, 27 फरवरी । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस नेताओं को सख्त चेतावनी देते हुए इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (आईपैक) पर सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करने से मना किया है। उन्होंने साफ किया कि यह अब प्रशांत किशोर (पीके) की संस्था नहीं है और पार्टी के सभी नेताओं को इसके साथ सहयोग करना होगा।

गुरुवार को नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित विशाल जनसभा में ममता ने कहा कि यह पीके की आईपैक नहीं है। वह अब एक राजनीतिक दल चला रहे हैं। यह एक नई टीम है और सभी को इसके साथ मिलकर काम करना होगा। इनके खिलाफ उल्टे-सीधे बयान देना बंद करें, क्योंकि हम सबको मिलकर आगे बढ़ना है।

इससे पहले, बजट सत्र से पहले पार्टी की बैठक में ममता ने आईपैक पर कुछ ऐसे बयान दिए थे, जिन्हें बहुत सकारात्मक नहीं माना गया था। इससे कई तृणमूल नेताओं को लगा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी आईपैक से दूरी बना सकती है। इसी सोच के तहत कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से आईपैक की आलोचना शुरू कर दी थी। सबसे अधिक हमलावर मदन मित्रा रहे, वहीं वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने भी इसकी आलोचना की थी।

लेकिन गुरुवार को ममता के बयान के बाद अब पार्टी के नेता इस संस्था पर खुलकर टिप्पणी करने से बचेंगे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, “सीएम समझ चुकी हैं कि भाजपा बंगाल में पेशेवर एजेंसियों का सहारा ले रही है, इसलिए हमें भी चुनावी रणनीति के लिए पेशेवर एजेंसियों की जरूरत है।”

तृणमूल के कई नेता पहले भी आईपैक पर पार्टी के अंदर गुटबाजी बढ़ाने का आरोप लगा चुके हैं। कुणाल घोष ने एक बार यहां तक कहा था कि प्रतीक जैन को पार्टी का अध्यक्ष बना देना चाहिए। मदन मित्रा ने आरोप लगाया था कि आईपैक के लोग टिकट के बदले पैसे लेते हैं। उन्होंने कहा था, “हमारी पार्टी में पहले पैसे के लेन-देन का कोई चलन नहीं था। लेकिन इस एजेंसी के आने के बाद यह सब शुरू हुआ। मैंने 2021 के चुनाव में लोगों को पैसे देने के बाद भी रोते देखा है।” कल्याण बनर्जी ने भी आरोप लगाया था कि आईपैक के लोग पैसे लेकर स्थानीय स्तर पर अपने पसंदीदा लोगों को पद दिलवा रहे हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में भाजपा की अप्रत्याशित सफलता के बाद, तृणमूल ने चुनावी रणनीति के लिए प्रशांत किशोर की कंपनी आईपैक की मदद ली। इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल ने 213 सीटें जीतकर जबरदस्त जीत दर्ज की, जिसमें आईपैक की भूमिका अहम रही। हालांकि, चुनाव के बाद प्रशांत किशोर ने राजनीतिक रणनीति से संन्यास ले लिया और 2022 में तृणमूल ने आधिकारिक रूप से उनके साथ नाता तोड़ लिया। लेकिन आईपैक अब भी पार्टी और राज्य प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है।

2024 के लोकसभा चुनाव में भी आईपैक ने तृणमूल के साथ काम किया, जिसमें पार्टी ने 29 सीटें जीतीं। ममता का दावा है कि पांच सीटों पर गड़बड़ी कर उन्हें हराया गया, नहीं तो उनकी पार्टी 34 सीटें जीतती।

ममता बनर्जी के ताजा बयान से साफ है कि प्रतीक जैन के नेतृत्व में आईपैक 2026 के विधानसभा चुनाव में भी तृणमूल की रणनीति में अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए उन्होंने पार्टी नेताओं को पहले ही साफ कर दिया कि वे इस संस्था पर कोई गलत टिप्पणी न करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि काम सबको मिलकर करना होगा।

दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनाव में आईपैक आम आदमी पार्टी (आप) के लिए काम कर रही थी, लेकिन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। 62 सीटों से घटकर आप की सीटें 22 रह गईं। हालांकि, बंगाल में ममता को अब भी भरोसा है कि आईपैक उनकी चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।