कोलकाता, 30 अक्टूबर । आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय भ्रष्टाचार मामले में एक और आरोपित को जमानत मिल गई है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को ‘हाजरा मेडिकल’ के मालिक सुमन हाजरा को सशर्त जमानत दे दी। यह फैसला न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने सुनाया। इससे पहले इसी मामले में मुख्य आरोपित और आर.जी. कर के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष को भी जमानत मिल चुकी है।
सुमन हाजरा पर आरोप था कि उन्होंने डॉ. संदीप घोष के साथ साठगांठ कर चिकित्सा उपकरण खरीद में भ्रष्टाचार किया था। इसी आरोप के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्हें दो सितंबर 2024 को गिरफ्तार किया था। उच्च न्यायालय ने हाजरा की जमानत के लिए कुछ कड़ी शर्तें भी तय की हैं।
अदालत के निर्देशानुसार, सुमन हाजरा को निचली अदालत में 20 हजार रुपये के दो जमानती बांड जमा करने होंगे। जमानत पर रिहा होने के बाद, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत की सभी सुनवाइयों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा। अदालत ने हाजरा के कोलकाता, हावड़ा और विधाननगर (साल्टलेक) इलाकों से बाहर जाने पर भी सख्त रोक लगा दी है। इसके अलावा, उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा और सीबीआई के जांच अधिकारी को अपना एक विशेष मोबाइल नंबर भी देना होगा, जिसे बदला नहीं जा सकेगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि हाजरा किसी भी सूरत में गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।
सीबीआई के अनुसार, सुमन हाजरा आर.जी. कर अस्पताल में चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति के व्यवसाय से जुड़े थे। जांचकर्ताओं का आरोप है कि हाजरा ने पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष के करीबी सहयोगी के रूप में अस्पताल की खरीद और टेंडर (निविदा) प्रक्रिया में अवैध तरीके से अपना प्रभाव डाला।
आरोप है कि 2021 से 2024 के बीच अस्पताल में चिकित्सा उपकरण और दवा खरीद में धांधली करने के लिए एक ‘कार्टेल’ (गिरोह) बनाया गया था, जिसके केंद्र में डॉ. संदीप घोष थे। इस कार्टेल के प्रमुख सदस्यों के रूप में सुमन हाजरा और एक अन्य व्यवसायी बिप्लब सिंहा का नाम सामने आया था। आरोप है कि इन लोगों ने अन्य व्यापारियों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने से रोका और अपनी पसंदीदा कंपनियों को ही टेंडर दिलाने की व्यवस्था की।
केंद्रीय जांच एजेंसी का दावा है कि फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया को दरकिनार करने और बाजार दर से अधिक कीमत पर चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई के आरोप पत्र (चार्जशीट) में इस नुकसान की राशि लगभग सात करोड़ रुपये आंकी गई है। बाद में इस वित्तीय हेराफेरी की मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी जांच शुरू की थी। केंद्रीय जांच एजेंसियों ने इस मामले में संदीप घोष और सुमन हाजरा सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ अपनी जांच पूरी कर आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया है।
