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रांची, 27 अक्टूबर। झारखंड उच्च न्यायालय ने बोकारो जिले के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र में 18 वर्षीय युवती के लापता होने और बाद में उसका कंकाल बरामद होने के मामले में पुलिस अधिकारियों की लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ की जा रही जांच की अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 5 जनवरी 2028 को निर्धारित की गई है।

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विंसेंट रोहित मार्की ने पक्ष रखा। इससे पहले अदालत को बताया गया था कि पिंडराजोरा थाने में तैनात सभी 28 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले हैं। इसके आधार पर बोकारो के पुलिस अधीक्षक के आदेश से सभी को निलंबित कर दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि पिंडराजोरा थाना क्षेत्र की 18 वर्षीय युवती जुलाई 2025 में लापता हो गई थी। परिजनों ने उसकी तलाश के लिए कई बार पुलिस से संपर्क किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट होकर युवती की मां ने झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की।

अदालत के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने एक आरोपित की निशानदेही पर जंगल से युवती का कंकाल बरामद किया। पुलिस के अनुसार, युवती की हत्या उसके पूर्व प्रेमी ने की थी। उच्च न्यायालय ने बरामद अवशेषों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए माता-पिता के डीएनए से मिलान कराने का भी आदेश दिया था।

पूर्व की सुनवाई में उच्च न्यायालय ने युवती की गुमशुदगी की जांच में बरती गई लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि जब परिजनों की शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही थी, तब जिले के पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी क्या कर रहे थे। आरोपित की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए प्रभावी निगरानी नहीं किए जाने की जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया गया था।

इसके बाद 7 अक्टूबर 2026 को पुलिस महानिदेशक ने विशेष शाखा के पुलिस महानिरीक्षक को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कथित लापरवाही की व्यापक जांच करने का आदेश दिया था। अब उच्च न्यायालय ने इस जांच की अंतिम रिपोर्ट आठ सप्ताह के भीतर पेश करने को कहा है।