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14 माह बाद दाखिल की गई थी याचिका-हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप से किया इनकार

रांची, 12 अक्टूबर । हाई स्कूल ग्रेजुएट ट्रेंड टीचर नियुक्ति विज्ञापन संख्या 21/2016 से जुड़े मामले में नागेंद्र नाथ परिहार को झारखंड उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सोमवार को उनकी सिविल रिव्यू याचिका खारिज कर दी। याचिका उच्च न्यायालय की खंडपीठ के पूर्व आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी। अदालत ने कहा कि सिविल रिव्यू याचिका 14 माह बाद दाखिल की गई है। खंडपीठ ने पूर्व के आदेश में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया।

सुनवाई के दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता शहबाज अख्तर ने पक्ष रखा।

जेएसएससी ने एकल पीठ के समक्ष बताया था कि सत्यजीत कुमार मामले में उच्चतम न्यायालय के 2 अगस्त 2022 के आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर राज्यस्तरीय मेरिट सूची के आधार पर विचार किया गया था। हालांकि, याचिकाकर्ता ने बीसी-2 श्रेणी के तहत आवेदन किया था, लेकिन राज्यस्तरीय मेरिट सूची में बीसी-1 और बीसी-2 श्रेणियों के अंतिम चयनित अभ्यर्थियों की तुलना में उसके अंक कम थे। इस कारण उसका चयन नहीं हो सका।

जेएसएससी की इसी दलील के आधार पर उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद नागेंद्र नाथ परिहार ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपील (एलपीए) दाखिल की थी। खंडपीठ ने भी एकल पीठ के आदेश में कोई त्रुटि नहीं पाई और अपील खारिज कर दी थी।

इसके बाद प्रार्थी ने खंडपीठ के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय में सिविल रिव्यू याचिका दाखिल की थी। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया।