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कोलकाता, 30 सितंबर । पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद हल्दिया जेल से रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर आते ही उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए। मिलन प्रधान ने दावा किया कि उन पर नामांकन वापस लेने का भारी दबाव बनाया जा रहा था और उन्हें यह अंदेशा हो गया था कि उनका एनकाउंटर भी किया जा सकता है।

‘आंखों पर गमछा बांधकर ले गई पुलिस’

जेल से रिहाई के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए मिलन प्रधान ने आरोप लगाया कि मुझे आंखों पर गमछा बांधकर उठाया गया था। पुलिस की ओर से लगातार उम्मीदवारी वापस लेने का दबाव दिया जा रहा था। मुझे लगा था कि शायद मेरा एनकाउंटर कर दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और किसी भी दबाव के आगे वे झुकने वाले नहीं हैं। झूठे मुकदमों के सहारे मुझे रोका नहीं जा सकता। जनता सब देख और समझ रही है, और इसका करारा जवाब वह मतदान पेटी के जरिए देगी।

मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ प्रचार का आगाज

जेल से बाहर आने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। रिहाई के तुरंत बाद मिलन प्रधान ने ऐलान किया कि वे आज से ही चुनाव प्रचार में उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम में स्थानीय मंदिर में पूजा-अर्चना करने के साथ ही उनके चुनाव प्रचार अभियान की औपचारिक शुरुआत होगी।

गौरतलब है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने मंगलवार को मिलन प्रधान को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर आगामी 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत प्रदान की थी। अदालत ने यह राहत उन्हें चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने के मद्देनजर दी है। हालांकि, आदेश के तहत मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के बाद उन्हें हल्दिया अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा और नियमित रूप से दिन में दो बार पुलिस के साथ फोन पर संपर्क में रहना होगा।

उच्च न्यायालय के इस फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार 24 घंटे के भीतर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी। हालांकि, देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार की त्वरित सुनवाई की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा।

उल्लेखनीय है कि नंदीग्राम सीट पर आगामी छह अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित है। कांग्रेस द्वारा मिलन प्रधान को उम्मीदवार घोषित किए जाने के तुरंत बाद पुलिस ने वर्ष 2007 के पुराने मामलों का हवाला देते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान राज्य के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल/एडिशनल एडवोकेट जनरल ने दलील दी थी कि चुनाव लड़ने के आधार पर किसी आरोपित को राहत देना सही मिसाल नहीं है, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया। कानूनी अड़चनों के दूर होने और उम्मीदवार की रिहाई के बाद अब नंदीग्राम के सियासी रण में कांग्रेस पूरी ताकत से उतरने के लिए तैयार दिख रही है।