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गिरिडीह, 28 सितंबर । झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधा। सोमवार को गिरिडीह में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त सहित तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने स्पष्ट किया है कि आयोग में लिए गए फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। ऐसे में उनके इस्तीफे की मांग का कोई औचित्य नहीं है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सहित अन्य मुद्दों पर निर्वाचन आयोग में किसी तरह का एकतरफा निर्णय नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल अंग्रेजी अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष जिस तरह का रुख अपना रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि उसे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई बड़ा आधार मिल गया है।

मरांडी ने कहा कि विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर तथ्यों के आधार पर बात करनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर 2014 के बाद से विभिन्न मुद्दों के जरिए जनता में भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

एमएमडीआर संशोधन कानून को लेकर पूछे गए सवाल पर बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इस कानून का विरोध कर रही है तो यह विरोध केवल झारखंड तक सीमित क्यों है, जबकि कांग्रेस शासित अन्य राज्यों में भी इसके प्रभाव को लेकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने एमएमडीआर कानून को देश और राज्य के हित में बताते हुए कहा कि विपक्ष अब तक इसके खिलाफ अपने आरोपों को साबित नहीं कर पाया है।

मरांडी ने कहा कि एसआईआर और एमएमडीआर जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने दोनों मामलों में विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए केंद्र और राज्य से जुड़े विषयों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा।