Darjeeling: Dudia Iron Bridge Collapses

Kurseong: A view of the collapsed Dudia Iron Bridge connecting Mirik and Kurseong in Darjeeling district, West Bengal, on Sunday, October 5, 2025. The collapse, triggered by heavy rainfall and subsequent landslides, has severed vital road links in the region. (Photo: IANS)

कोलकाता , 25 सितंबर। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मानिकचक स्थित भूतनी द्वीप के कई हिस्सों से बाढ़ का पानी अब उतरने लगा है, लेकिन प्रभावित लोगों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। कई महत्वपूर्ण सड़कों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने या पानी के तेज बहाव में बह जाने के कारण, भूतनी का एक बड़ा हिस्सा सड़क मार्ग से अब भी मानिकचक से कटा हुआ है।

उत्तर चंडीपुर के निवासियों ने बताया कि बाढ़ के पानी के तेज बहाव से लगभग 10 किलोमीटर लंबी सड़क गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई है, और कई हिस्सों में तो सड़क का नामोनिशान तक मिट गया है। दक्षिण चंडीपुर और हीरानंदपुर से भी हालात ऐसे ही होने की सूचना मिली है।

सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे और दरारें बन गई हैं, जिससे लोगों की आवाजाही बेहद मुश्किल हो गई है। कई जगहों पर पैदल चलना भी एक बड़ी चुनौती है, जबकि वाहनों का गुजरना लगभग असंभव हो चुका है। इसके परिणामस्वरूप, भूतनी और मानिकचक के बीच सड़क यातायात पूरी तरह से चरमरा गया है।

प्रभावित ग्रामीणों की मांगों और विरोध के बाद, मानिकचक के विधायक गौर चंद्र मंडल ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि मरम्मत का काम तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिया गया है।

विधायक ने कहा, “प्रशासन अगले कुछ दिनों के भीतर सड़कों को इस्तेमाल के लायक बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि भूतनी के कई निचले इलाकों में अब भी पानी जमा है, जिसे पंपों की मदद से निकालने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

इस संकट की घड़ी में भूतनी के बाढ़ पीड़ितों को मालदा पॉलिटेक्निक के शिक्षकों और छात्रों की ओर से सराहनीय मदद मिली है। छात्रों का एक समूह भूतनी के सबसे अधिक प्रभावित और दूरस्थ इलाकों में से एक, उत्तर चंडीपुर के समीरुद्दीटोला में राहत सामग्री बांटने पहुंचा।

शिक्षक अरिंदम विश्वास के नेतृत्व और प्रोफेसर शुभा दास के मार्गदर्शन में गई इस टीम में 14 छात्र शामिल थे। विशेष रूप से तीन छात्राओं ने इस राहत अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कठिन रास्तों की परवाह किए बिना उन्होंने अपने सहपाठियों के साथ मिलकर काम किया और स्थानीय महिलाओं के बीच सेनेटरी नैपकिन का वितरण किया।

राहत सामग्री को पहले नाव के जरिए उत्तर चंडीपुर ले जाया गया और फिर आगे की यात्रा के लिए इसे ट्रैक्टर पर लादा गया। राहत कार्य में जुटे छात्रों ने बताया कि इस यात्रा ने उन्हें बाढ़ पीड़ितों की कठिनाइयों को प्रत्यक्ष रूप से महसूस करने का अवसर दिया। उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़कें, जलभराव और उन लोगों की कठिन जीवन स्थितियों को देखा, जो पानी कम होने के बावजूद सामान्य जीवन में लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

दूसरी ओर, भूतनी के निवासियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता सड़क यातायात की बहाली है। उनका कहना है कि जब तक इन ध्वस्त सड़कों की जल्द से जल्द मरम्मत नहीं की जाती, तब तक आवश्यक सेवाओं, परिवहन और राहत सामग्री तक उनकी पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।